सर्दी की शुरुआत के साथ ही शहर में तिब्बती वुलंस का लोकप्रिय मौसमी बाजार एक बार फिर सज गया है। पहले यह बाजार बेगमपुल पर लगता था, लेकिन पिछले लगभग 10 वर्षों से इसे सूरजकुंड पार्क के बाहर लगाया जा रहा है। व्यापारियों ने बताया कि अब हाथ से बुनाई वाले कपड़े कम पसंद किए जाते हैं, इसलिए वे मशीन से तैयार आधुनिक वुलंस पर फोकस कर रहे हैं। यह बाजार दिवाली के बाद से फरवरी तक चलता है और सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहता है। तिब्बत से आई दुकानदार तेनज़िन ने कहा कि दूसरे देश में आकर दुकान लगाने में थोड़ी दिक्कत होती है, लेकिन पूरे साल की कमाई इसी सीजनल बाजार से होती है। उन्होंने बताया कि तिब्बती जैकेट्स की खासियत यह है कि उनमें इस्तेमाल हुए फैब्रिक तक की जानकारी मिल जाती है। हम पूरे साल सर्दियों का इंतजार करते हैं ताकि फिर मेरठ आकर दुकान लगा सकें, तेनज़िन ने कहा। दार्जिलिंग से आई श्रद्धा राय ने बताया कि लगभग 60 प्रतिशत सामान बिक जाता है, लेकिन करीब 40 प्रतिशत बचा हुआ स्टॉक उन्हें वापस ले जाना पड़ता है। वहां के दुकान वाले बचा हुआ सामान वापस नहीं लेते, इसलिए नुकसान उठाना पड़ता है, उन्होंने कहा। तिब्बती वुलंस मार्केट में हर उम्र के लिए विस्तृत रेंज उपलब्ध है-जैकेट, शॉल, पोंचू, गाउन, कुर्ती, कोट, ट्राउज़र, वूलेन ड्रेस, जुराबें, जूतियां, कैप्स, मंकी कैप, स्कार्फ, दस्ताने आदि। सभी कपड़ों में आधुनिक डिजिटल प्रिंट और नए डिजाइन देखने को मिलते हैं। कीमतें लगभग 400 से 6000 तक उपलब्ध हैं।