मेरठ में विश्व अस्थमा दिवस के अवसर पर वरिष्ठ चेस्ट फिजिशियन डॉ. वीरोत्तम तोमर (डॉ. शिवराज मेमोरियल चेस्ट एंड एलर्जी सेंटर) ने अस्थमा को लेकर लोगों को जागरूक किया। उन्होंने कहा कि अस्थमा के रोगियों को इनहेलर से काफी राहत मिलती है और समय पर सही उपचार बेहद जरूरी है। इस वर्ष की वैश्विक थीम प्रत्येक अस्थमा रोगी के लिए एंटी-इंफ्लेमेटरी इनहेलर की उपलब्धता पर जोर देते हुए उन्होंने बताया कि अस्थमा का इलाज केवल लक्षणों को दबाने से नहीं, बल्कि इसके मूल कारण यानी श्वसन तंत्र की सूजन को नियंत्रित करके किया जाना चाहिए। डॉ. तोमर ने बताया कि यदि रात में सांस लेने में कठिनाई, छाती में कसाव या जकड़न, घरघराहट या गले से सीटी जैसी आवाज आने की समस्या महसूस हो तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण अस्थमा के संकेत हो सकते हैं। उन्होंने सलाह दी कि अस्थमा के मरीजों को इस मौसम में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए और धूल, मिट्टी तथा पराग कणों के संपर्क से बचना चाहिए, ताकि बीमारी के लक्षणों को नियंत्रित रखा जा सके।