मथुरा में हत्या कर शव जलाने और साक्ष्य मिटाने के सात साल पुराने मामले में अपर सत्र न्यायाधीश पंचम नीलम ढाका की अदालत ने तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने तीनों पर 12-12 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। एडीजीसी हेमेंद्र भारद्वाज ने बताया कि शहर कोतवाली क्षेत्र के सप्तऋषि नगर निवासी गुड्डी देवी ने बेटे राजेश उर्फ लाला की हत्या के मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप के अनुसार, 28 अप्रैल 2017 को पड़ोस में रहने वाला विक्की उर्फ मुन्नी उनके 25 बेटे वर्षीय राजेश अग्रवाल को अपने साथ ले गया था। देर रात तक राजेश घर नहीं लौटा। अगले दिन विक्की के भाई ने बताया कि दोनों परिक्रमा लगाने गए हैं। इसके बाद भी राजेश के घर नहीं लौटने पर परिजन ने उसकी तलाश की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। गुड्डी देवी के अनुसार, तीसरे दिन पड़ोसी अपने घर पर ताला लगाकर फरार हो गए। इसी दौरान बिच्छू क्लब के खंडहर में एक जला हुआ शव मिलने की जानकारी मिली। कपड़ों और हाथ पर गुदे नाम से शव की पहचान राजेश के रूप में की गई। पुलिस ने पीड़िता की तहरीर पर विक्की को नामजद करते हुए तीन अज्ञात साथियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। विवेचना के दौरान विक्की के साथ गोपाल चतुर्वेदी निवासी सप्तऋषि नगर, ध्रुव घाट और बाबू सैनी उर्फ जयप्रकाश निवासी किशन टीला, भैंस बहोरा के नाम सामने आए। पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश पंचम की अदालत में हुई। प्रस्तुत साक्ष्यों और सुनवाई के बाद अदालत ने तीनों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और 12-12 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।