कोसीकलां। महर्षि दुर्वासा की तपोस्थली कांमर में शुक्रवार को मिनी कुंभ के दर्शन हुए। नव दिवसीय सहस्त्र चंडी महायज्ञ के समापन पर यज्ञ की पूर्णाहुति और आरती में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। भक्तों ने आहुतियां देकर विश्व शांति और समृद्धि की कामना की। वही समापन पर आयोजित भंडारे में 52 पालों की सिरदारी के करीब एक लाख से अधिक ग्रामीणों ने हिस्सा लिया। बूंदावादी के मध्य ग्रामीण महिलाओं और बच्चों के साथ नए-नए परिधानों में सजकर बैंड-बाजों के साथ नृत्य करते हुए कार्यक्रम स्थल पर पहुंच रहे थे। आश्रम परिसर को आठ सेक्टरों में विभाजित कर कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण ने सुबह से ही व्यवस्थाओं की कमान संभाली थी। आगरा-दिल्ली के मध्य की 52 पालों की सिरदारी के साथ जाव, बठैन, हुलवाना, पीपरवाला, कादौना, पैगांव, नंदगांव, कोटवन, लालपुर, नगरिया, फालैन सहित दूर-दराज से ग्रामीणों की भीड़ पहुंची थी। ब्रज मंडल त्यागी साधु समाज के सचिव महंत बलराम दास महाराज ने कहा कि सहस्त्र चंडी यज्ञ से भक्तों को आर्थिक तंगी, पारिवारिक कलह और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। यह यज्ञ स्वास्थ्य, धन और सफलता के लिए अत्यंत शक्तिशाली माना गया है, जिसका वर्णन दुर्गा सप्तशती के 12वें और 13वें अध्याय में भी मिलता है। वही कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण ने कहा कि यज्ञ से मानव का मन और भावना पवित्र होती है अच्छे कर्मों को करना और दूसरे की भलाई करना ही धर्म है।