वृंदावन में भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा निकाली गई। गाजे बाजे, घंटे घड़ियाल के साथ सड़कों पर चकानैन, जगन्नाथ गूंजता रहा। जगह जगह रथों पर सवार होकर भाई बलभद्र, बहन सुभद्रा संग निकले भगवान जगन्नाथ का भव्य स्वागत किया गया। भगवान जगन्नाथ 16 दिन तक बीमार रहने के बाद ठीक होने पर बृहस्पतिवार को नगर भ्रमण पर निकले। रथ की रस्सी खींचने के लिए लोगों में होड़ मची रही। प्राचीन जगन्नाथ मंदिर से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा तीन अलग-अलग रथों पर विराजमान होकर निकले। मंदिर के महंत स्वामी ज्ञानप्रकाश पुरी महाराज ने बताया कि भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा और सुदर्शन चक्र के विग्रह करीब साढ़े पांच सौ वर्ष पहले पुरी से लाए गए थे। वहीं गौरा नगर और चैतन्य विहार स्थित जगन्नाथ मंदिर सहित सप्तदेवालय से भव्य शोभायात्रा निकाली गई। चंद्रोदय मंदिर में भगवान श्रीजगन्नाथ, बलदेव एवं सुभद्रा की भव्य रथयात्रा निकाली गई। संपूर्ण मंदिर परिसर हरिनाम संकीर्तन, मृदंग एवं करताल की मधुर ध्वनि तथा जय जगन्नाथ के उद्घोष से भक्तिमय हो उठा। रथयात्रा से पूर्व भगवान श्री जगन्नाथ का विशेष शृंगार कर राजभोग अर्पित किए गए। फूल बंगला आकर्षण का केंद्र रहा। रथयात्रा के उपरांत भगवान की भव्य आरती उतारी गई। श्री अग्रबिहारी मंदिर में ठाकुर श्री अग्रबिहारी महाराज का रथ यात्रा महोत्सव धूमधाम के साथ मनाया गया। मंदिर के सेवायत पंडित दाऊ दयाल शर्मा ने बताया कि यात्रा से पूर्व ठाकुरजी का दूध, दही, शर्करा, घी, शहद और विभिन्न प्रकार की जड़ी-बूटियों के साथ महाअभिषेक कर नवीन वस्त्र और आभूषण धारण कराए गए। रथयात्रा गोपीनाथ बाजार से होकर गुजरी। श्रद्धालुओं द्वारा ठाकुरजी की आरती उतारी और भोग अर्पित किया गया। रथ को हाथों से खींचने के लिए भक्तों में उत्साह रहा। रथ यात्रा में श्यामबिहारी शर्मा, शैलेंद्र शर्मा, अंकुर शर्मा, हरिबल्लभ गुप्ता, विष्णु गुप्ता, जितेंद्र कुमार वार्ष्णेय रोनू, पूनम शर्मा, रेनू शर्मा, सीमा शर्मा, नंदिनी, चारु, पूर्वी आदि मौजूद रहे। ठाकुर राधादामोदर मंदिर से भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा धूमधाम से निकाली गई। शृंगार सेवा के उपरांत ठाकुर जी की महाआरती उतारी गई। महाआरती के समय शंखध्वनि, घंटे-घड़ियाल और मृदंग की थाप पर भक्त झूमते नजर आए। रथयात्रा के आगे बड़े गोसाई आचार्य कनिका प्रसाद गोस्वामी महाराज स्वयं अपने हाथों से सोहनी सेवा करते हुए चल रहे थे। रथ को खींचने का सौभाग्य मंदिर के सेवायत आचार्य दामोदर चंद्र गोस्वामी और महामंडलेश्वर सत्यानन्द सरस्वती गिरी अधिकारी गुरु महाराज को प्राप्त हुआ। सेवायत आचार्य दामोदर चंद्र गोस्वामी महाराज ने बताया कि ठाकुर राधा दामोदर मंदिर में सदियों पुरानी दिव्य परंपराओं का आज निर्वहन किया जा रहा है।