कहीं जींस-टॉप में दुल्हन सात फेरे लेने पहुंची तो कहीं मांग में सिंदूर भरने की रस्म की जगह माथे पर टीका लगाकर विवाह की औपचारिकता पूरी कर ली गई। किसी ने सलवार-सूट में वरमाला डाली तो कोई पारंपरिक दुल्हन के जोड़े के बिना ही मंडप में पहुंच गई। यह नजारा कहीं और नहीं बल्कि बिधनू में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत आयोजित शादी समारोह में देखने को मिला। मंडप के नीचे बैठे जोड़ों की इन तस्वीरों ने आयोजन के स्वरूप और सरकारी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। गरीब परिवारों की बेटियों को सम्मान के साथ विवाह का अवसर देने के लिए आयोजित समारोह में रस्मों का यह बदला अंदाज चर्चा का विषय बना रहा। वहीं, पहले से प्रेम विवाह कर चुके जोड़ों के दोबारा सामूहिक विवाह समारोह में शामिल कर योजना का लाभ दे दिया गया। बिधनू के कठेरूवा स्थित गेस्ट हाउस में समाजकल्याण विभाग ने चार दिवसीय सामूहिक विवाह समारोह का शुभारंभ शुक्रवार को हुआ। पहले दिन भीतरगांव ब्लॉक के 108 जोड़ों का विवाह कराया गया। इनमें 10 मुस्लिम जोड़ों का निकाह भी शामिल रहा। समारोह में प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में विवाह की रस्में पूरी कराई गईं लेकिन आयोजन की तस्वीरों में सबसे ज्यादा चर्चा उन दुल्हनों की रही, जो जींस-टॉप और सलवार-कुर्ता में ही सात फेरे लेने मंडप में पहुंच गईं। विवाह के दौरान कहीं पारंपरिक रस्में निभाई गईं तो कहीं मांग भरने के बजाय माथे पर टीका लगाकर रस्म पूरी की गई।