वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए जीएसटी वार्षिक रिटर्न फॉर्म-9 और फॉर्म-9सी दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2026 निर्धारित की गई है। इसके अतिरिक्त चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के टीडीएस रिटर्न 31 अक्तूबर 2026 तक दाखिल करने होंगे। वहीं आयकर टैक्स ऑडिट के दायरे में आने वाले कारोबारियों और कंपनियों के आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 21 नवंबर 2026 तक बढ़ा दी गई है। मर्चेंट चैंबर आफ उत्तर प्रदेश की जीएसटी कमेटी के चेयरमैन संतोष कुमार गुप्ता ने बताया कि सरकार ने दो करोड़ रुपये तक के सालाना कारोबार वाले व्यापारियों को जीएसटी वार्षिक रिटर्न फॉर्म-9 दाखिल करने से छूट दी है। हालांकि यदि सालाना सकल कारोबार दो करोड़ रुपये से अधिक है, तो यह रिटर्न 31 दिसंबर 2026 तक अनिवार्य रूप से दाखिल करना होगा। 01 जनवरी 2027 या उसके बाद दाखिल करने पर प्रतिदिन 200 रुपये का विलंब शुल्क लगेगा। जिन कारोबारियों का सालाना कारोबार पांच करोड़ रुपये या इससे अधिक है। उन्हें वित्तीय वर्ष 2025-26 का वार्षिक समाधान विवरण फॉर्म-9सी भी 31 दिसंबर 2026 तक दाखिल करना होगा। यह विवरण अब चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा प्रमाणित नहीं होगा। बल्कि कारोबारी को स्वयं प्रमाणित करना होगा। यदि इस विवरण के आधार पर कोई करदेयता बनती है या अधिक इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लिया गया है, तो उसका भुगतान ब्याज सहित डीआरसी-03 के माध्यम से करना होगा। उन्होंने बताया कि आयकर कानून की धारा 44एबी के तहत टैक्स ऑडिट के दायरे में आने वाले कारोबारियों के आयकर रिटर्न 21 नवंबर 2026 तक दाखिल किए जाने हैं। इन मामलों में टैक्स ऑडिट रिपोर्ट 21 अक्तूबर 2026 तक अपलोड की जानी थी। नए आयकर कानून 2025 की धारा 393 के तहत, चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के टीडीएस रिटर्न 31 अक्तूबर 2026 तक दाखिल करने होंगे। यदि यह रिटर्न 01 नवंबर 2026 या उसके बाद दाखिल किया जाता है, तो प्रतिदिन 200 रुपये का विलंब शुल्क अदा करना होगा, जिसकी अधिकतम सीमा टीडीएस धनराशि के बराबर होगी।