रवि यादव और मधुराम त्रिपाठी दोनों दोस्त थे। ग्रामीणों के मुताबिक, रवि पर गैंगस्टर लगने के बाद मधुराम ने उसका साथ छोड़ दिया। इसके बाद दोनों ने अलग-अलग गांव की राजनीति शुरू कर दी। दोनों अपने अपने कुनबे की पंचायत में सक्रिय भूमिका अदा करने लगे और देखते ही देखते रंजिश की लकीर बढ़ती चली गई।