जनवरी की इस हड्डी कपा देने वाली ठंड में जहाँ लोग अपने घरों में रजाई के भीतर दुबके हैं, वहीं गाँव के छोटे किसान लोग खुले आसमान के नीचे मचान पर रात गुजारने को विवश हैं। भीतरगांव ब्लॉक के बिरहर, मुल्लाखेड़ा, रसूलपुर उमरा, पचनगढ़ व गोपालपुर सहित कई गांव के खेतों में बड़ी संख्या में मचान बने हुए हैं। पछुआ हवा के बर्फीले झोंकों और नीलगायों के आतंक के बीच किसान की जद्दोजहद की यह तस्वीर भारतीय कृषि व्यवस्था की कड़वी सच्चाई बयां करती है।