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Delhi Blast Update: दिल्ली विस्फोट का Balrampur कनेक्शन! 25 संदिग्ध...रोहिंग्या एंगल पर जांच

दिल्ली विस्फोट के बाद डॉ. शाहीन और डॉ. परवेज अंसारी का कनेक्शन सामने आने से कमिश्नरी पुलिस के साथ जांच एजेंसियां सतर्क हैं। शहर के संवेदनशील और अति संवेदनशील क्षेत्रों की जांच की गई, जिसमें से 25 और संदिग्ध सामने आए हैं। यह बंगाली और उर्दू भाषा बोलते हैं।इनके रोहिंग्या होने की आशंका पर जांच शुरू हो गई है। प्रारंभिक जांच में इनका मूलपता बलरामपुर से सटे गांवों का मिला है। एलआईयू और विशेष पुलिसकर्मी जांच के लिए भेजे गए हैं। शहर में पाकिस्तानी, बांग्लादेश समेत अन्य देशों के लोग रह रहे हैं। इसकी जानकारी पुलिस के पास है। एलआईयू, खुफिया और थानास्तर पर पुलिस की ओर से कराई गई जांच में 125 संदिग्धों के नाम सामने आए थे। उनकी पहचान के लिए असम और बिहार से सटे कुछ गांवों में चार टीमें भेजी गई थीं। शहर में असम और बिहार के मूल पते वाले 50 प्रतिशत लोगों की पहचान सही मिली। उनकी संपत्ति और दस्तावेजों का मिलान कर लिया गया है। गुरुवार को 25 संदिग्ध नाम और सामने आए हैं। यह एक साथ रहकर कारोबार में जुड़े हुए हैं। इनका मूल निवास बलरामपुर बार्डर से सटे गांव हैं। कमिश्नरी पुलिस के अधिकारियों के मुताबिक शनिवार को तीन सदस्यीय टीम रवाना की गई है। यह संदिग्धों की जानकारी जुटाएगी। पुलिस की कई टीमें सोमवार को पश्चिम बंगाल के लिए रवाना की जाएंगी। यहां के अधिकारियों ने कुछ की डिटेल वहां की इंटेलीजेंस यूनिट को पहले ही भेज दी थी। हालांकि, अब तक उसकी कोई रिपोर्ट नहीं आ सकी है।

वहीं आपको बता दें आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग की कमांडर डॉ. शाहीन चार साल सऊदी अरब में भी रही है। साल 2014 से 2018 के दौरान उसने सऊदी अरब के मेडिकल कॉलेज में बतौर प्रोफेसर नौकरी की। साल 2018 में भारत लौटने के बाद 2021 तक तीन साल उसने कुछ नहीं किया। वो घर पर ही रहती थी।  फिर 2021 में उसने अल फलाह यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर की नौकरी हासिल कर ली। जांच एजेंसी के सूत्रों की मानें तो सऊदी अरब से जब वो लौटी तो आतंकी संगठन के संपर्क में आ चुकी थी। इसी दौरान जब वो तीन साल खाली रही तो वो आतंकी गतिविधियों में लिप्त हो गई और अपना नेटवर्क फैलाने लगी। इस दौरान उसे टेरर फंडिंग के रुपये भी काफी मिले।साल 2021 में अल फलाह यूनिवर्सिटी में कार्यरत होने के बाद उसने यहां व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल के तहत अन्य डॉक्टरों से संपर्क बढ़ाया। इसमें वो डॉ. मुजम्मिल के बेहद करीब आ गई थी। दोनों के बीच नजदीकीयां काफी बढ़ गईं और प्यार और शादी तक ये रिश्ता पहुंच गया। इसके पीछे भी मकसद अपने नेटवर्क को बढ़ाना और अन्य लोगों को उसमें शामिल करना ही रहा। मामले में अब तक की जांच जम्मू कश्मीर पुलिस, दिल्ली स्पेशल सेल की टीम ने की थी। इस दौरान दोनों ही टीमों ने अल फलाह यूनिवर्सिटी में डॉ. शाहीन के फ्लैट नंबर 32 के लॉकर आदि की जांच की। यहां पर टीम को एक डिजिटल लॉकर भी मिला था, जिसे टीम पहले खोल नहीं सकी थी। गुरुवार रात एनआईए की टीम डॉ. शाहीन को निशानदेही के लिए लेकर पहुंची तो टीम ने उससे ये डिजिटल लॉकर खुलवाया।  लॉकर खोला गया तो उसमें कई सारे पैकेट दिखे जिसमें खाकी रंग की टेप भी लगी थी। शाहीन से उनके बारे में पूछा तो बोली कि इन पैकेट में सामान है। पैकेट खोलकर चेक किया तो उसमें 500 के नोट भरे थे। सभी पैकेट खोलकर चेक किए तो इनमें 18.50 लाख रुपये नकद, सोने के दो बिस्किट, गहने मिले। सोने के बिस्किट व जूलरी का कुल वजन 300 ग्राम पाया गया। इसके साथ ही सऊदी अरब की करेंसी भी लॉकर से टीम को मिली।

 

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