माझा क्षेत्र में बाढ़ का जलस्तर घटने लगा है, लेकिन लोगों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। कई मजरे अब भी पानी से घिरे हैं। कहीं नाव की कमी है तो कहीं पशुओं के चारे का संकट बना हुआ है। व्योन्दा माझा के सभी मजरे पानी से घिरे हैं। प्रशासक केशवराम यादव ने बताया कि प्रशासन ने यहां पर्याप्त नाव उपलब्ध करा दी हैं, लेकिन भूसा और पन्नी समेत अन्य जरूरी सामान की जरूरत है। गांव के गंगाराम ने बताया कि मुख्य मार्ग पर पानी भरा होने से लोगों को पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। सड़क को ऊंचा कर देने से समस्या दूर हो सकती है। उन्होंने बाढ़ और कटान से गांव को बचाने के लिए बंधे के निर्माण की भी मांग की। दत्तनगर से व्योन्दा माझा जाने वाला मुख्य मार्ग रिंग रोड के पास पानी के तेज बहाव से कटने लगा है। दत्तनगर के बाड़ी, टाड़ी और बैसिया में जलभराव से आवागमन प्रभावित है। प्रशासक राजाराम यादव ने बताया कि यहां पर्याप्त नाव नहीं मिल सकी है। कटान के कारण पलायन कर चुके करीब आधा दर्जन परिवारों को प्रशासन की ओर से अभी कोई मदद नहीं मिली है। अहिरन टाड़ी के नन्हें यादव ने बताया कि पशुओं के चारे का संकट खड़ा हो गया है। पानी भरने से हरा चारा मिलना भी मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों को प्रशासन से भूसा मिलने की उम्मीद है। साकीपुर के अट्ठईसा और चहलावा मजरे भी पानी से घिरे हैं। यहां लोगों को आवागमन के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है