मेहनत व सतत अभ्यास न केवल सफलता दिलाता है बल्कि यह भी साबित करता है कि प्रतिभा संसाधन की मोहताज नहीं होती। इसे एक बार फिर साबित कर दिखाया है हरख ब्लॉक के बरौली मलिक गांव के कृष्णा कनौजिया ने। पड़ोस के गांव उधवापुर के सरकारी स्कूल में कक्षा आठ में पढ़ने वाले 14 वर्षीय बच्चे ने ऐसा मॉडल बनाया है, जो घरों के रोशनदान को बिना बिजली के जब चाहें खोलने और बंद करने में सक्षम है। यह साधारण दिखने वाला पर अद्भुत मॉडल अब राष्ट्रीय स्तर के विज्ञान मेले में प्रदर्शित किया जाएगा। बरौली मलिक गांव के राम महेश लखनऊ के गोमती नगर में एक टेबल पर कपड़े प्रेस कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। अमर उजाला की टीम जब बृहस्पतिवार को कृष्णा के घर पहुंची, तो सामने बिना पलस्तर की दीवारों वाला कमरा और एक कोने में सजी इंस्पायर अवार्ड योजना की शील्ड व वहीं पास में बैठी कृष्णा की मां सेवावती की आंखों में खुशी और गर्व की नमी थी। बोली कि कृष्णा ने कभी कुछ मांगा नहीं। जो भी किया, अपने जेब खर्च से किया। कृष्णा ने घर में पड़ी पुरानी रस्सी और कुछ पुर्जों से एक ऐसा सिस्टम तैयार किया, जिससे रोशनदान से नीचे लटकती रस्सी को खींचने पर वह खुल जाता है और दोबारा खींचने पर बंद हो जाता है।