बलरामपुर। स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत गांवों से निकलने वाले कूड़े कचरे और प्लास्टिक का भी उपयोग होगा। पंचायती राज विभाग गांव से निकलने वाले प्लास्टिक वेस्ट (अपशिष्ट) को पंचायतों से एकत्रित करेगा। उसे ब्लॉक में बनने वाले प्लास्टिक मैनेजमेंट केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा। केंद्रों पर प्लास्टिक से दाना तैयार किया जाएगा। इसका प्रयोग डामर के साथ सड़कों के निर्माण में होगा।
प्लास्टिक वेस्ट से बनने वाली सड़क मजबूत होगी और पर्यावरण को नुकसान नहीं होगा। जिले के गोंदीपुर में पीडब्ल्यूएमयू (प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट) बनकर तैयार हो चुका है। शहर से लेकर गांव तक धड़ल्ले से प्रयोग हो रही प्लास्टिक को लेकर हाय-तौबा मची हुई है। कृषि भूमि को बंजर बनाने तथा नाले नालियों को चोक करने वाले प्लास्टिक अपशिष्ट को निकाला जाएगा। ओडीएफ प्लस के तहत चयनित होने वाले गांवों में प्लास्टिक बैंक की स्थापना अलग से की जा रही है। प्लास्टिक बैंक में एकत्रित होने वाले प्लास्टिक अपशिष्ट को एकत्रित किया जाएगा। इसके बाद प्रत्येक ब्लाॅक स्तर पर एकत्रित होने वाली प्लास्टिक को प्रबंधन केंद्रों पर पहुंचाया जाएगा। यहां प्लास्टिक से दाना अथवा चिप्स बनाने का काम किया जाएगा। इसका प्रयोग सड़क बनवाने के साथ अन्य कार्यों में किया जाएगा।
शीघ्र पीडब्ल्यूएमयू का शुरू होगा संचालन
स्वच्छ भारत मिशन के जिला समन्वयक रजनीश चौधरी ने बताया कि गोंदीपुर में करीब 16 लाख रुपये की लागत से प्लास्टिक वेस्ट मेनेजमेंट यूनिट (पीडब्ल्यूएमयू) बनकर तैयार हुआ चुका है। एक सप्ताह के अंदर उसका संचालन शुरू करा दिया जाएगा। इसके अलावा मथुरा व हरैया में आरआरसी सेंटर बनकर तैयार हुआ चुका है, अन्य ब्लॉकों में भी आरआरसी सेंटर का निर्माण करवाया जाएगा। प्लास्टिक से दाना एवं चिप्स बनाने का काम होगा। इसका प्रयोग सड़कों के निर्माण में किया जा सकेगा। जलभराव वाले स्थलों पर प्रयोग किए जाने से सड़क खराब होने की संभावना कम होगी।
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होंगे ये लाभ
- गांव को कूड़ा कचरा मुक्त बनाया जा सकेगा।
- प्लास्टिक मुक्त गांव रहेंगे।
- प्रदूषण से काफी हद तक निजात मिलेगी।
- ग्राम पंचायत की आय में वृद्धि होगी।
जल्द होगा संचालन
गोंदीपुर में प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट स्थापित की गई है। उसका ट्रायल भी कराया जा चुका है। विद्युतीकरण का कार्य करवाया जा रहा है। शीघ्र ही यूनिट का संचालन शुरू करवा दिया जाएगा। प्लास्टिक कचरे से मुक्ति दिलाने में यह संयंत्र मील सहायक होगा। - श्रेया उपाध्याय, डीपीआरओ, बलरामपुर