जिला अस्पताल में व्याप्त दुर्व्यवस्था और भ्रष्टाचार को लेकर युवाओं ने सामाजिक कार्यकर्ता प्रेम वर्मा के नेतृत्व में सोमवार को मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को 11 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा। जिसमें आरोप लगाया कि अस्पताल में आम जनता को शासन के अनुरूप सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं और भ्रष्टाचार चरम पर है। उन्होंने शासन से मिलने वाली सुविधाओं का लाभ आमजन को देने की मांग की। मांग पत्र में उल्लेख किया है कि ऑपरेशन के लिए उपकरण और अन्य सुविधाओं की कमी का बहाना बनाकर मरीजों से रुपये लेकर निजी आवासों या मेडिकल स्टोर पर जमा कराई जाती है। कुछ मामलों में तो जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को सुविधाओं की कमी बताकर निजी अस्पतालों में ऑपरेशन के लिए भेजा जाता है, और बाद में उन्हें वापस सरकारी अस्पताल में भर्ती कर दिया जाता है। कहा कि चिकित्सक द्वारा कमीशन वाली दवाएं बाहर से लिखी जाती है। रात्रि में आपातकालीन वार्ड में मरीज के पहुंचते ही 500 से 2000 रुपये तक की बाहरी दवाएं लिख दी जाती हैं। उन्होंने मांग की कि आपातकालीन वार्ड में 24 घंटे कम से कम दो डॉक्टर और तीन फार्मासिस्ट तैनात हों, और उनकी जिम्मेदारियां तय की जाएं। साथ ही आपातकालीन वार्ड में 24 घंटे ईसीजी और विद्युत हृदयाघात मशीन उपलब्ध हो, और कमीशन वाली बाहरी दवाओं पर रोक लगे।उन्होंने आपातकालीन वार्ड में निजी मेडिकल स्टोर मालिकों और जांच केंद्र मालिकों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की भी मांग की। इसके अतिरिक्त, ओपीडी में बाहरी दवाएं, जांच या एक्स-रे लिखने पर रोक लगाने, डॉक्टरों द्वारा अपने आवास पर निजी प्रैक्टिस पर प्रतिबंध लगाने और ऐसा करने पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की गई।इसके साथ ही ओपीडी में डॉक्टरों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने सहित किस डॉक्टर की किस दिन ओटी ड्यूटी या राउंड है, इसे सार्वजनिक किया जाए। जिला अस्पताल में ऑपरेशन के वक्त उपयोग होने वाले उपकरण और अन्य सामान अस्पताल में ही उपलब्ध कराने सहित अन्य मांग शामिल है। इस मौके पर राशिद कमाल, सरोज वर्मा, धनंजय यादव, दिलीप मौर्या, अखिलेश मौर्या, विष्णु यादव, विशाल कुमार, राहुल कुमार, अनीश साहनी, अर्जुन प्रसाद, श्रीभगवान आदि रहे।