एक मई से कामर्शियल छोटे व बड़े सिलिंडर की कीमत बढ़ने के बाद फास्ट फूड के छोटे व्यसायियों की परेशानी बढ़ा दी है। कुछ व्यवसाई दाम बढ़ाने के बजाए खाद्य सामग्री की मात्रा कम करने पर विचार करने लगे है, वहीं कुछ व्यवसाई खाद्य सामग्री के दाम बढ़ाने की तैयारी में है। गैस के बढ़े दाम का असर दो दिनों में दिखाई देने लगेगा। सरकार ने एक मई से कामर्शियल के छोटे व बड़े सिलिंडर में बेतहाशा वृद्धि कर दी है। एक मई से 19 किलो का सिलिंडर 993 रूपये मंहगा कर दिया है, जबकि पांच किलो के छोटे सिलिंडर के दाम में 261 रूपये की बढ़ोत्तरी हो गई है। दाम बढ़ने के बाद अब जिले में 19 किलो का कामर्शियल सिलिंडर 3223 और पांच किलो के छोटे सिलिंडर 667 में मिलेगा। गैस के दाम बढ़ने के बाद अभी तक जिले के गैस गोदामों से एक भी कामर्शियल सिलिंडर की डिलीवरी नही हुई है। दामों बढ़ने के बाद अब होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा व सड़क की पटरियों लगने वाले ठेलों पर फास्ट फूट के व्यवसाई असमंजस में पड़ गए है। सबसे ज्यादा परेशानी छोटे व्यवसाईयों को होने लगी है। सभी को अपने व्यापार ठप होने की चिंता सताने लगी है। मजबूरी में बढ़ाना पड़ेगा दाम छोला भटूरा व पूड़ी सब्जी का ठेला लगाने वाले राजेंद्र कुमार ने बताया कि गैस के बढ़े दाम ने सभी को असमंजस में डाल दिया है। पहले से ही खाद्य सामग्रियों पर मंहगाई का बोझ पड़ रहा था। ऐसी स्थित मेें किसी तरह तीस-तीस रूपए में चार पूड़ी व दो भटूरा बेचा जा रहा था। अब गैस के दाम बढ़ने के बाद मजबूरीवश दोनों सामग्री पर कम से कम दस-दस रूपये की बढ़ोत्तरी करनी पड़ेगी। सरकार को अपने निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए। मंहगाई के बीच कैसे चले व्यापार फास्टफूड व छोला भटूरा का ठेला लगाने वाले दीपक कुमार का कहना है कि पहले से ही काफी मशक्कत के बाद गैस मिल रही थी। अब सरकार ने गैस के दाम में इस कदर की बढ़ोत्तरी कर दी है, जो सपने में भी नहीं सोचा गया था। इस मंहगाई के बीच कैसे व्यापार चलाया जाए, कुछ समझ में नहीं आ रहा है। दीपक का कहना है कि फिलहाल तो अभी खाद्य सामग्री के दाम में बढ़ोत्तरी नहीं की गई है, लेकिन अगर स्थित यही रही, तो मजबूरी में दाम बढ़ाना पड़ेगा।