अयोध्या के रुदौली क्षेत्र में सरयू नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से तटीय क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। शुक्रवार शाम चार बजे नदी का जलस्तर 92.540 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 92.730 मीटर है। खतरे के निशान से महज 19 सेंटीमीटर नीचे जलस्तर पहुंचने से तटीय गांवों के साथ खेतों में भी पानी भर गया है। सलाहपुर और कैथी क्षेत्र में हजारों बीघे फसलें जलमग्न होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। सलाहपुर गांव निवासी नजर अली ने बताया कि उनकी करीब चार बीघे धान की फसल पानी में डूब गई है। उन्होंने कहा कि सरयू का जलस्तर लगातार बढ़ने से खेतों में पानी भर गया है। यदि जलस्तर जल्द कम नहीं हुआ तो पानी में डूबी धान की फसल सड़कर बर्बाद हो जाएगी। गांव की घिराऊ और विमला ने बताया कि धान और गन्ने की फसल भी जलमग्न हो गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि फसलें बर्बाद होने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई मुआवजा नहीं मिलता है। उनका कहना है कि फसल नुकसान का सर्वे करने के लिए तहसील प्रशासन का कोई कर्मचारी गांव में नहीं पहुंचता है। किसानों ने प्रशासन से जल्द सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है। कैथी और आसपास के गांवों के खेतों में भी पानी पहुंचने से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि नदी का जलस्तर और बढ़ा तो बड़ी मात्रा में फसलें प्रभावित हो सकती हैं। किसानों ने प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कराकर नुकसान का आकलन कराने की मांग की है। तटीय गांवों के ग्रामीणों ने प्रशासनिक तैयारियों पर भी सवाल उठाए हैं। पसैया, महगुपुरवा और मरौचा के ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ की स्थिति में आवागमन के लिए जिन स्थानों पर सरकारी नावों की जरूरत है, वहां अभी तक नाव की व्यवस्था नहीं की गई है। ग्रामीणों ने तहसील प्रशासन से तत्काल सरकारी नाव उपलब्ध कराने की मांग की है। एसडीएम विनोद गुप्ता ने बताया कि सरयू के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। फिलहाल तटबंध सुरक्षित हैं। तहसील प्रशासन ने बाढ़ चौकियों पर कर्मचारियों, लेखपालों और कानूनगो की 24 घंटे ड्यूटी लगा दी है। प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। तटीय गांवों और प्रभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जा रही है। जहां आवश्यकता होगी, वहां नाव समेत अन्य जरूरी व्यवस्थाएं कराई जाएंगी। फसल नुकसान की स्थिति में नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।