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अयोध्या में भगवान श्रीराम और माता सीता की गलबहियां झांकी के दर्शन से भावविभोर हुए श्रद्धालु

सावन की फुहारों से भीगी रामनगरी अयोध्या में रविवार को भक्ति, प्रेम और रस की ऐसी त्रिवेणी प्रवाहित हुई कि रंगमहल मंदिर का वातावरण मानो साकेत धाम का साक्षात स्वरूप बन उठा। भगवान श्रीराम और माता सीता की गलबहियां झांकी के दर्शन करते ही श्रद्धालुओं की आंखें श्रद्धा और भाव-विभोरता से नम हो उठीं। एक-दूसरे के गले में बांहें डाले श्रीसीताराम का यह मनोहारी स्वरूप भक्तों के लिए अद्भुत आध्यात्मिक अनुभूति का कारण बना। मंदिर के महंत रामशरण दास ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आरती कर झांकी का शुभारंभ किया। धूप, दीप, पुष्पों की सुगंध और मंदिर की घंटियों की मधुर अनुगूंज ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। जैसे ही आरती की लौ भगवान के श्रीचरणों तक पहुंची, वैसे ही श्रद्धालुओं के मुख से एक स्वर में जयघोष गूंज उठा और पूरा रंगमहल सियाराममय हो गया। झांकी के साथ सजी संगीत सभा ने इस आध्यात्मिक आयोजन को और अधिक भावपूर्ण बना दिया। महान रसिक संत सरयू शरण की परंपरा से जुड़े पदों के साथ अन्य आचार्यों की रसपूर्ण प्रस्तुतियों ने प्रेम, भक्ति और अध्यात्म की ऐसी धारा प्रवाहित की कि श्रद्धालु देर तक उसमें डूबे रहे । झांकी महोत्सव में रामनगरी के प्रमुख संत-महात्माओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। महंत देवेंद्रप्रसादाचार्य, महंत कमल नयन दास, जगद्गुरु रामदिनेशाचार्य, जगद्गुरु डॉ. राघवाचार्य, महंत वैदेही बल्लभ शरण, महंत डॉ. भरत दास आदि उपस्थित रहे।

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