अंबेडकरनगर में गांव-गांव विकास की तस्वीरें दिखाई जाती हैं, करोड़ों की योजनाओं का दावा होता है, लेकिन भियांव विकासखंड का लखमीपुर पूर्व का करमुल्लाहपुर गांव आज भी एक पुल के लिए तरस रहा है। तीन तरफ से तमसा नदी से घिरे इस गांव में बरसात आते ही जिंदगी जैसे ठहर जाती है। नदी उफनती है तो गांव जाने वाला लकड़ी का पुल डूबकर टूट जाता है। स्कूल जाने वाले बच्चों की पढ़ाई रुक जाती है, गर्भवती महिलाओं की सांसें अटक जाती हैं। बीमारों की जिंदगी भगवान भरोसे हो जाती है और युवाओं के सपने भी नदी की धारा में बह जाते हैं। करमुल्लाहपुर के लोगों ने मजबूरी को ही व्यवस्था बना लिया है। हर साल ग्रामीण चंदा जुटाकर तमसा नदी पर लकड़ी का अस्थायी पुल तैयार करते हैं। इसमें 15 से 20 हजार रुपये का खर्च भी आता है। बरसात बढ़ते ही वही पुल जर्जर होकर टूट जाता है या नदी में समा जाता है। इस बार भी पुल से पांच लोग नदी में गिरकर घायल हो गए। इससे पहले भी कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन किसी जिम्मेदार की संवेदनाएं नहीं जागीं। फिलहाल जिला प्रशासन की ओर से ग्रामीणों के आवागमन के लिए नावें मुहैया करा दी गई हैं। इन नावों पर सफर करना भी किसी जोखिम से कम नहीं है।