महाकुंभ की संस्कृति का वाहक और पोषक युवा हैं। कुंभ का आयोजन राजा हर्षवर्धन के राज्यकाल (664 ईसा पूर्व) में आरंभ हुआ था। प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेनसांग ने अपनी भारत यात्रा के समय कुंभ मेले के आयोजन का उल्लेख किया है। ह्वेनसांग ने कहा है कि राजा हर्षवर्धन हर पांच साल में गंगा,यमुना, अदृश्य सरस्वती के संगम पर एक बड़ा आयोजन करते थे, जिसमें वह अपना पूरा कोष गरीबों और धार्मिक लोगों में दान दे देते थे।