प्रयागराज के जीरो रोड पर शिवशक्ति सेना की ओर से शस्त्र पूजन का आयोजन किया गया। दशहरे के दिन विधि-विधान से शस्त्र पूजन कर भगवान राम और आदिशक्ति मां दुर्गा की आराधना की गई। इस मौके पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। विजयादशमी पर शस्त्रपूजन असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक माना जाता है। यह विजय, शक्ति और सुरक्षा की कामना करने का अनुष्ठान है। यह राजाओं द्वारा युद्ध पर जाने से पहले की जाने वाली एक प्राचीन परंपरा है। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान राम की रावण पर जीत और देवी दुर्गा की महिषासुर पर विजय का उत्सव भी है। शस्त्रों की पूजा से योद्धाओं में वीरता, साहस और समर्पण की भावना बढ़ती है। सनातन परंपरा में आश्विन मास के शुक्लपक्ष की दशमी तिथि का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है, क्योंकि इस दिन एक नहीं कई पर्व और पूजाएं होती हैं। हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान श्री राम ने रावण का वध करके लंका पर विजय हासिल की थी। इसी दिन देवी दुर्गा की प्रतिमा और कलश का विधि-विधान से विसर्जन होता है।