चैत्र नवरात्रि के अंतिम दिन मंदिरों में देवी की पूजा अराधना की गई। देवी स्वरूप में नौ कन्याओं का पूजन कर उनको मिष्ठान फल आदि का भोग लगाया गया। साथ ही पैर पखारकर पूजा की गई। सुबह से ही घरों और मंदिरों में कन्या पूजन चलता रहा। चुनरी ओढाकर फूल माला पहनाई गई और विधि विधान से कन्या पूजन किया गया। इसके बाद हवन कुंड में देवी मंत्रों के साथ आहूतियां डाली गई। इसी के साथ नवरात्रि के नौ दिनों के अनुष्ठान को विराम दिया गया।