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एआई नहीं, एजीआई से मानवता को होगा सबसे बड़ा खतरा - बालेंदु शर्मा दाधीच

राजर्षि टंडन स्मृति व्याख्यानमाला में कृत्रिम मेधा और भारतीय ज्ञान परंपरा पर मंथन कुलपति प्रो. सत्यकाम बोले— पाठ्यक्रमों में एआई का समावेश अब समय की आवश्यकता उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में भारत रत्न राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन की 144वीं जयंती पर आयोजित 19वीं राजर्षि टंडन स्मृति व्याख्यानमाला में कृत्रिम मेधा (एआई), आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (एजीआई) और भारतीय ज्ञान परंपरा पर गंभीर विमर्श हुआ। व्याख्यानमाला का विषय 'कृत्रिम मेधा एवं भारतीय ज्ञान परंपरा' रहा।

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