हापुड़ के रहने वाले शिवम को अपने घर के पास स्थित तालाब के किनारे एक कछुआ दर्द से तड़पता हुआ मिला। उसके पिछले हिस्से से कुछ अजीब सा बाहर निकला हुआ था। पहली नज़र में शिवम को समझ में आ गया कि कछुआ किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है। उन्होंने उसे तुरंत अपने घर ले जाकर एक पानी से भरे टब में रखा और अगले दिन सरकारी और निजी पशु चिकित्सालयों में दिखाने ले गया। दुर्भाग्यवश, कहीं भी कछुए का इलाज संभव नहीं हो सका। सभी पशु चिकित्कों ने हाथ खड़े कर दिये। तब अलीगढ़ के पशु चिकित्सक डॉ विराम वार्ष्णेय ने सर्जरी कर कछुआ की जान बचाई।