आगरा में शाहजहां-मुमताज की कब्र पर साल 2025 की समाप्ति से चार दिन पहले शनिवार को मोहब्बत की बेमिसाल निशानी देखने वालों का सैलाब उमड़ा। गुनगुनी धूप और गजब की भीड़ से होकर देखने हम भी गए। जगह-जगह गहरा पहरा। संग-ए-मरमर में समाए हुए ख़्वाबों की सेल्फी लेने की होड़ में क्या हिन्दू, क्या मुसलमान... क्या उत्तर क्या दक्षिण भारत... वैश्विक संगम के बीच अरब देश की दो युवतियां आपस में बात करती दिखीं, 'यहां तो मुसलमान से ज्यादा हिंदू ताज का दीदार कर रहे हैं'। वहीं पूर्वोत्तर की एक युवती दूसरी से पूछ रही थी, 'इसे क्यूं बनाया था'। उजली देह पर मुमताज की मोहब्बत की नायाब निशानी के अलावा भी मुगल शासक की बड़ी सोच रही होगी। यमुना तीरे ताज के सामने बनी मस्जिद, अतिथि भवन, महल पर स्पष्ट आयतें, लाल किले से सीधी निगहबानी, वैकल्पिक नदी मार्ग और बहुत कुछ...। इस्लाम के प्रचार-प्रसार की... शहंशाह शाहजहां की बेहद मजबूत प्रशासनिक और सामरिक समझ भी साफ नजर आती है। इन दिनों 400 साल से अधिक पुराने इस कलात्मक महल के गुंबद से हो रहे रिसाव को रोकने का काम तेजी से चल रहा है फिर भी दुनिया के सात अजूबों में शामिल इस खूबसूरत धरोहर को यादों को संजोने के लिए युवा तो युवा बच्चे-बुजुर्ग भी बेताब दिखे। नए साल में भी इसी तरह सभी के चेहरे पर रौनक बरकरार रहे।