शिमला के रिज मैदान के ओपन थियेटर में राज्य स्तरीय पहाड़ी दिवस पर पारंपरिक लोक वाद्य, लोक नाट्य, लोक गायन और लोकनृत्यों के माध्यम से कलाकारों ने हिमाचल की संस्कृति की अद्भुत झलक पेश की। नारकंडा से कलाकारों ने ठोडा लोकनृत्य की भव्य प्रस्तुति दी। इसे देखने के लिए भारी संख्या में लोग उमड़े। महाभारत काल की युद्ध शैली को शिमला संसदीय क्षेत्र में दूरदराज के ग्रामीणों ने ठोडा नृत्य के रूप में जीवंत रखा है। जानकारी के अनुसार तीर कमान के इस खेल में पाशी और शाठी के दो दल एक दूसरे के खिलाफ खेलते हैं। यह खेल सतयुग से खेला जा रहा है। पहले यह युद्ध शैली थी जो अब खेल का रूप ले चुका है। इस खेल में इस्तेमाल किए जाने वाले तीर विशेष चांव की लकड़ी से बनते हैं। इसमें हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों के पास तीर कमान, ढांगरू, सिलारा, डागरा और चमड़े का जूता पहना जाता है। खेल में पैर पर तीर मारने पर फाउल माना जाता है।