अयोध्या के 3 माई बाड़े में 40-45 महिलाएं रहती हैं। कोई बंगाल, मप्र तो कोई महाराष्ट्र, बिहार और यूपी के अलग-अलग जिलों से यहां आई हैं। कोई घर से परेशान है तो किसी को राघव श्री राम की भक्ति खींच लाई है। यहां की महिला संत कायदों की पक्की हैं। कभी मांगकर नहीं खातीं। आकाशवृत्ति परंपरा को मानती हैं, इसलिए जो यहां दे गया, उसी से काम चलता है। सुबह उठकर पूजन पाठ करती हैं। बिना भोग, खाना नहीं खातीं। और बाथरूम जाने के भी अलग कपड़े रखती हैं। बिल्कुल साधुओं वाले नियम। हां थोड़ा बहुत वक्त मिल गया, तो पंचायत जरूर कर लेती हैं।