नागौर जिले के कुचेरा थाना क्षेत्र के निम्बड़ी चंदावाता गांव में खेत में मजदूरी करने गई महिला मजदूरों के साथ मारपीट का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। फसल कटाई के बाद मजदूरी की मांग करने पर खेत मालिक द्वारा की गई कथित मारपीट के विरोध में सोमवार को बावरी समाज के सैकड़ों लोग लामबंद हो गए।
आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग
प्रदर्शनकारी कुचेरा बाईपास पर एकत्रित हुए और धरना-प्रदर्शन कर शाम को जिला कलेक्टर एवं जिला पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा। समाज के लोगों ने मारपीट के सभी आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की। देर शाम अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने प्रदर्शनकारियों से समझाइश कर धरना समाप्त करवाया। हालांकि पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए बीती रात एक आरोपी युवक को गिरफ्तार किया है, लेकिन समाज के लोग अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े हुए हैं।
पीड़ितों के गंभीर आरोप
पीड़ित महिलाओं का आरोप है कि हमलावरों ने न केवल बेरहमी से मारपीट की, बल्कि जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए महिलाओं का सार्वजनिक रूप से अपमान भी किया। हमले में कई महिलाएं गंभीर रूप से घायल हुईं, जबकि एक महिला को मृत समझकर छोड़ दिया गया। गंभीर रूप से घायल महिला का उपचार फिलहाल राजकीय चिकित्सालय, नागौर में जारी है।
तीन दिन से धरना, कार्रवाई पर सवाल
घटना के बाद से कुचेरा गांव में पीड़ित परिवारों एवं समाज के लोगों द्वारा पिछले तीन दिनों से धरना-प्रदर्शन किया जा रहा है। आरोप है कि इसके बावजूद पुलिस और प्रशासन के उच्च अधिकारियों द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। पीड़ितों का कहना है कि मामले में अब तक जानलेवा हमला और संगठित अपराध जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है।
SC/ST एक्ट की अनदेखी का आरोप
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि यह मामला अनुसूचित जाति/विमुक्त जाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत स्पष्ट रूप से दर्ज होने योग्य है, लेकिन पुलिस जानबूझकर कमजोर धाराएं लगाकर आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रही है।
48 घंटे का अल्टीमेटम
पीड़ितों एवं समाज के लोगों ने प्रशासन को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा में आरोपियों के खिलाफ जानलेवा हमला, संगठित अपराध एवं SC/ST एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी नहीं की गई, तो वे विधानसभा अथवा प्रशासनिक कार्यालय के समक्ष बड़ा आंदोलन करेंगे, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
सामाजिक संगठनों में रोष
घटना को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में भी भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि गरीब, घुमंतू और विमुक्त जाति की महिला मजदूरों के साथ इस तरह की हिंसा लोकतंत्र और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। फिलहाल गांव में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है और सभी की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन के और उग्र होने की आशंका जताई जा रही है।
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क्या बोला प्रशासन?
जिला कलेक्टर चंपालाल जीनगर ने बताया कि पीड़ित परिवारों ने उनसे मिलकर ज्ञापन सौंपा है, जिसमें जांच अधिकारी बदलने की मांग की गई थी। इस पर जिला पुलिस अधीक्षक को जांच किसी अन्य अधिकारी से कराने के निर्देश दिए गए हैं।
वहीं अतिरिक्त जिला पुलिस अधीक्षक आसाराम चौधरी ने बताया कि उन्होंने धरना स्थल पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों से समझाइश की, जिसके बाद धरना समाप्त करवाया गया। उन्होंने बताया कि एक आरोपी को कुचेरा थाना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है तथा अब मामले की जांच मेड़ता वृत्ताधिकारी द्वारा की जा रही है।