दुष्कर्म के आरोप में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम ने आखिरकार शनिवार को जोधपुर सेंट्रल जेल में सरेंडर कर दिया। राजस्थान हाईकोर्ट ने उसकी अंतरिम जमानत बढ़ाने से इंकार करते हुए 27 अगस्त को आदेश दिया था कि वो 11 बजे तक जेल में सरेंडर करें।
आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने 14 जनवरी को उपचार के लिए अंतरिम जमानत दी थी। तब से वो लगातार जेल से बाहर था। हालांकि अहमदाबाद सिविल अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट में उसकी तबीयत को स्थिर बताते हुए अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं बताई गई। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने जमानत बढ़ाने से इंकार कर दिया और सरेंडर का आदेश दिया।
शनिवार को आसाराम अपने अधिवक्ताओं और समर्थकों के साथ पाल आश्रम से सीधे जोधपुर सेंट्रल जेल पहुंचा। जेल गेट पर प्रवेश करते वक्त उसने व्हील चेयर का सहारा लिया, ताकि अपनी बीमारी का हवाला दे सके। इसके बाद जेल प्रशासन ने उसे अंदर ले लिया।
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मेडिकल रिपोर्ट का विवरण
अहमदाबाद सिविल अस्पताल के मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि आसाराम ने बीते 3-4 महीनों में इलाज के लिए कई अस्पतालों का रुख किया, लेकिन कहीं भी नियमित फॉलो-अप नहीं कराया। वहीं 21 अगस्त को एम्स जोधपुर के डॉक्टरों ने उसकी स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ने की रिपोर्ट दी थी। हालांकि हाईकोर्ट ने इस तर्क को मानने से इंकार कर दिया।
गुजरात हाईकोर्ट से अब भी जमानत
राजस्थान हाईकोर्ट ने भले ही जमानत बढ़ाने से इंकार कर दिया हो, लेकिन आसाराम को गुजरात हाईकोर्ट से 3 सितंबर तक अंतरिम जमानत मिली हुई है। गौरतलब है कि आसाराम को राजस्थान और गुजरात, दोनों जगह यौन उत्पीड़न के मामलों में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।
गौरतलब है कि साल 2013 में जोधपुर में एक नाबालिग ने आसाराम पर दुराचार का आरोप लगाया था। इसके बाद उसे छिंदवाड़ा आश्रम से गिरफ्तार कर जोधपुर लाया गया और जेल भेजा गया। 25 अप्रैल 2018 को जोधपुर की अदालत ने आसाराम को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद उसने कई बार सजा स्थगन और जमानत की कोशिश की, लेकिन राहत नहीं मिली। हाल ही में इलाज के नाम पर मिली अंतरिम जमानत की अवधि खत्म होने के बाद उसे सरेंडर करना पड़ा।