देसी कपास की खेती, खादी और पारंपरिक हथकरघा को बढ़ावा देने की जैतो की पहल अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात में फरीदकोट जिले के जैतो स्थित खेती विरासत मिशन के उपक्रम ‘नव त्रिंजण’ का विशेष उल्लेख किया। इसे क्षेत्र में पारंपरिक हुनर को सहेजने और उससे रोजगार के अवसर पैदा करने की दिशा में अहम पहचान के तौर पर देखा जा रहा है। नव त्रिंजण की खासियत देसी कपास की खेती से लेकर धागा तैयार करने और हथकरघे पर कपड़ा बुनने तक की प्रक्रिया को प्रोत्साहित करना है। इस प्रयास के जरिए किसानों, कारीगरों और बुनाई से जुड़ी महिलाओं को आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने के साथ खादी की परंपरा को आगे बढ़ाने का काम किया जा रहा है। खेती विरासत मिशन से जुड़ी रूपसी गर्ग ने कहा कि ‘नव त्रिंजण’ का मकसद देसी कपास और पारंपरिक बुनाई की विरासत को संरक्षित कर उसे आजीविका से जोड़ना है। इससे किसानों को देसी कपास की खेती के लिए प्रोत्साहन मिलता है, वहीं महिलाओं को अपने हुनर के जरिए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलता है। हथकरघा कारीगर रमणदीप कौर ने कहा कि हाथ से कपड़ा बुनना केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है। ऐसे प्रयासों से पारंपरिक कारीगरों को पहचान मिलती है और महिलाओं के हुनर को आगे बढ़ाने के अवसर पैदा होते हैं। प्रधानमंत्री द्वारा इस पहल का उल्लेख किए जाने से हथकरघा से जुड़े लोगों का उत्साह बढ़ा है। खेती विरासत मिशन के डायरेक्टर उमेंद्र दत्त के अनुसार, मिशन पिछले 21 वर्षों से प्राकृतिक खेती, पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम कर रहा है। नव त्रिंजण पिछले आठ वर्षों से हथकरघा के जरिए पारंपरिक बुनाई को बढ़ावा दे रहा है। इसका उद्देश्य देसी कपास से तैयार धागे और कपड़े को प्रोत्साहित करना, खादी की विरासत को सहेजना और इससे जुड़ी महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर नव त्रिंजण का प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली स्थित संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिला था। इस दौरान प्रधानमंत्री को खादी के कपड़े से तैयार तिरंगा और अन्य वस्तुएं भेंट की गई थीं। जैतो की इस पहल को राष्ट्रीय मंच पर मिली पहचान से देसी कपास, खादी और हथकरघा आधारित कामकाज को नई संभावनाएं मिलने की उम्मीद है।