सचखंड श्री दरबार साहिब के ग्रंथी ज्ञानी राजबीर सिंह ने जून 1984 के घल्लूघारे को याद करते हुए सिख इतिहास में शहीदों की कुर्बानियों को नमन किया। उन्होंने कहा कि सिख कौम ने समय-समय पर अनेक कठिनाइयों और हमलों का सामना किया है, लेकिन गुरु साहिबान से मिले साहस और प्रेरणा के चलते सिख पंथ का जज्बा कभी कमजोर नहीं पड़ा।