तरनतारन, 28 जुलाई (अमित मरवाहा)। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी), नई दिल्ली के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने सोमवार को अपने तरनतारन दौरे के दौरान आम लोगों की शिकायतें सुनीं, जिला प्रशासन के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की तथा केंद्र सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस अवसर पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए प्रियंक कानूनगो ने कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग देश के प्रत्येक नागरिक के मानवाधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि तरनतारन दौरे के दौरान लोगों द्वारा उठाए गए प्रत्येक मुद्दे पर आयोग गंभीरता से विचार करेगा तथा उनके समाधान के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि नागरिकों के अधिकारों की रक्षा और उन्हें न्याय दिलाना आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके बाद जिला प्रबंधकीय परिसर में जिला प्रशासन एवं विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक में कानूनगो ने केंद्र सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों की प्रगति का विस्तृत आकलन किया। बैठक के दौरान योजनाओं के क्रियान्वयन, लाभार्थियों तक उनकी पहुंच तथा प्रशासनिक व्यवस्था की समीक्षा की गई। समीक्षा बैठक में *प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, **प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, **पीएम विश्वकर्मा योजना, **पॉक्सो (POCSO) मामलों की स्थिति, **आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना, **मिशन वात्सल्य, **सेफ स्कूल वाहन योजना, **बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान, **दिव्यांगजन कौशल विकास योजनाओं, **शिक्षा विभाग की विभिन्न पहल* तथा अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रियंक कानूनगो ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सरकार की सभी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र लाभार्थी तक पूर्ण पारदर्शिता के साथ समय पर पहुंचाया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी पात्र व्यक्ति को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और न ही उसे किसी प्रकार की परेशानी का सामना करना पड़े। उन्होंने कहा कि जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी एवं पारदर्शी क्रियान्वयन प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी है तथा इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा संचालित योजनाओं का वास्तविक लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना ही सुशासन की पहचान है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग समय-समय पर ऐसे दौरों के माध्यम से न केवल मानवाधिकारों से जुड़े मामलों की समीक्षा करता है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि आम नागरिकों को उनके अधिकारों और सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ मिल सके।