संयुक्त कर्मचारी मंच और संयुक्त कर्मचारी फ्रंट की ओर से सोमवार को अमृतसर में विभिन्न कर्मचारी संगठनों की अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में पंजाब सरकार की कर्मचारी नीतियों के खिलाफ आंदोलन तेज करने का फैसला लिया गया। मंच के पदाधिकारी सुखचैन सिंह खैहरा व जगदीश ठाकुर ने बताया कि कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर 7 अगस्त को चंडीगढ़ में विशाल महा रैली आयोजित की जाएगी। इसकी तैयारी के तहत अमृतसर से अभियान की शुरुआत कर दी गई है। बैठक में कर्मचारी नेताओं ने आरोप लगाया कि 17 जुलाई 2020 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों को बेहद कम वेतन दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सी-श्रेणी के कर्मचारियों को लगभग ₹19,700 मासिक वेतन मिल रहा है, जबकि उन्हें ₹40,000 से ₹50,000 तक वेतन मिलना चाहिए। इसके अलावा पुरानी पेंशन योजना बहाल करने, 2.59 गुणांक लागू करने, कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने तथा महंगाई भत्ते (डीए) का बकाया जारी करने की मांग भी उठाई गई। नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार अपने प्रतिनिधियों की सुविधाएं और पेंशन बढ़ा रही है, जबकि कर्मचारियों और युवाओं की जायज मांगों की लगातार अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों पर लाठीचार्ज और दमनात्मक कार्रवाई के विरोध में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। कर्मचारी नेताओं के अनुसार, 7 अगस्त की महा रैली में क्लेरिकल स्टाफ, शिक्षक, तकनीकी कर्मचारी, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं सहित करीब 200 से 250 कर्मचारी संगठन भाग लेंगे। अमृतसर के बाद गुरदासपुर, पठानकोट, संगरूर समेत अन्य जिलों में भी बैठकों और जनसंपर्क अभियान का आयोजन किया जाएगा। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने कर्मचारियों की मांगों पर जल्द सकारात्मक फैसला नहीं लिया तो राज्यभर के लाखों कर्मचारी आंदोलन को और तेज करने के लिए मजबूर होंगे।