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Tansen Samaroh 2022: तानसेन समारोह में जिंबाब्वे के बैंड ने मचाई धूम, मंत्रमुग्ध होकर झूमे दर्शक

Wed, 21 Dec 2022 04:36 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर

प्रेम, विरह व श्रृंगार से परिपूर्ण संगीत की भावनात्मक मिठास दिलों को जोड़ती है। संगीत सरहदों में नहीं बंधता। संगीत का संदेश भी शास्वत है और वह है प्रेम। इस साल के तानसेन समारोह में भी भारतीय शास्त्रीय संगीत के मूर्धन्य साधकों और सुदूर अफ्रीकन देश जिम्बाबे से आए संगीत कला साधकों ने अपने गायन-वादन से यही संदेश दिया। पूरब और पश्चिम की सांगीतिक प्रस्तुतियों का गुणीय रसिकों ने बुधवार की सुबह आयोजित हो रही संगीत सभा में जी भरकर आनंद उठाया। सुबह की सर्द बेला में जिंबाब्वे के ब्लेसिंग चिमंगा बैंड के कलाकारों ने जब अलावा मारींबा, सिंथेसाइजर, गिटार, सैक्सोफोन, ड्रम और मरीबा नामक वाद्य यंत्रों से शास्त्रीय संगीत से साम्य स्थापित कर मीठी-मीठी विशुद्ध अफ्रीकन धुनें निकालीं तो एक बारगी ऐसा लगा मानो तानसेन के आंगन में हो रहे संगीत के महाकुंभ में विश्व संगीत की आहुतियां हो रहीं हैं। 

इस बैंड ने अफ्रीका की सांस्कृतिक व मौलिक धुनों को जब ऊर्जावान होकर तेज रिदम के साथ प्रस्तुत किया, तो युवा रसिक श्रोताओं में जोश भर गया। वहीं, प्रकृति से जुड़े और निखरे अफ्रीकन संगीत ने गुणीय रसिकों को भीतर तक प्रभावित किया। बैंड के मुख्य कलाकार चिमांगा हैं, जो अलावा मारींबा नामक अफ्रीकन वाद्य यंत्र बजाते हैं। तानसेन समारोह में हुई इस बैंड की प्रस्तुति में  सिंथेसाइजर व मबीरा पर अलीशा, गिटार पर जोलास बास और तुलानी कुवानी ने सैक्सोफोन पर संगत की। ड्रम व अन्य ताल वाद्यों पर ब्लेसिंग मापरुत्सा ने प्रोत्साहन दिया। आपको बता दें कि तानसेन समारोह का बुधवार को तीसरा दिन रहा। तानसेन समारोह में देश और विदेश के कलाकार अपने संगीत से तानसेन को श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

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