सागर-कटनी रेल रूट पर रेलवे द्वारा करीब एक हजार क्षमता वाले बैगन रख-रखाव के लिए वर्कशॉप डिपो बनाई जाना है। इसके लिए रेलवे द्वारा इस रूट पर जमीन खोजी जा रही है। रेलवे द्वारा अधिकारियों की एक टीम बनाई गई है, जो डिपो के लिए जमीन का सर्वे कर रही है।
अधिकारियों द्वारा दमोह जिले के असलाना, करैया भदौली, रीठी एवं सलैया स्टेशन के आसपास जमीन को देखा गया है। बताया गया है कि दमोह जिले के पथरिया व घटेरा रेलवे स्टेशन के बीच जमीन उपलब्ध हो जाती है तो यह दमोह जिले के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि हो सकती है। बैगन रख-रखाव डिपो खुलने से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बाहर के लोग दमोह आकर बसेंगे, जिससे जिला आर्थिक रूप से समृद्ध होगा, लेकिन इसके लिए जगह कमी आड़े आ रही है।
गौरतलब है कि नए बैगन डिपो के लिए रेलवे को 21.15 लाख वर्गमीटर (537 एकड़) जमीन की आवश्यकता है। इतनी जगह मिलने पर ही डिपो बनाया जा सकता है। जहां पर मालगाड़ियों के लिए एक हजार बैगन के लिए प्लांट, नया यार्ड, नई लाइन के अलावा अन्य मशीनरी कलपुर्जे के लिए अलग-अलग यार्ड बनाए जाएंगे।
बीना-कटनी रेल रूट रेलवे का सबसे महत्वपूर्ण रूट है। इस मार्ग से ही रेलवे द्वारा सबसे अधिक कोयले की ढुलाई की जाती है। जिससे प्रतिदिन 80 से 90 मालगाड़ियां यहां से निकलती हैं। तीसरी लाइन चालू होने के बाद इन गाड़ियों की संख्या 110 से 120 हो जाएगी। इसलिए इस रूट पर रेलवे एक हजार क्षमता वाली बैगन के रख-रखाव का डिपो बना रहा है।
मुआवजा देकर खरीद सकती है जमीन
अधिकारियों के अनुसार बैगन डिपो के लिए इतनी बड़ी जगह रेलवे के पास नहीं है। ऐसे में रेलवे लाइन के आसपास जमीन को खोजा जा रहा है। जहां पर लोगों को मुआवजा देकर रेलवे जमीन खरीद सकती है, लेकिन इसके लिए कई तरह की परेशानियां सामने आ रही हैं। कुछ लोग रेलवे द्वारा तय मुआवजा राशि से अधिक राशि चाहते हैं तो कुछ लोग अपनी जमीन बेचना नहीं चाहते। हालांकि ज्यादातर लोगों का कहना है कि जिले के विकास के लिए वह जगह दे सकते हैं।
यहां मिल सकती है जगह
दमोह के सागर नाका ओवरब्रिज के बाजू खेजरा मंदिर के सामने रेलवे लाइन से लगकर सैकड़ों एकड़ निजी जमीन है। रेलवे इस जमीन को निजी लोगों से खरीद सकता है। यह जगह दमोह रेलवे स्टेशन से महज एक किमी दूरी पर है। इसी तरह दमोह से इमलाई जाने वाले मार्ग पर भी जगह उपलब्ध हो सकती है। यहां पर सीमेंट फैक्ट्री के लिए रेलवे लाइन भी डली हुई है। जिससे रेलवे को अलग से नई लाइन डालने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
रेलवे के सीएंडडब्ल्यू विभाग में पदस्थ आशीष श्रीवास्तव का कहना है बैगन रख-रखरखाव डिपो के लिए चार-पांच रेलवे स्टेशनों के आसपास की जगह देखी जा रही है। दमोह में भी दो तीन जगह सर्वे किया है। जहां भी जगह उपलब्ध हो जाएगी वहां वर्कशॉप बनाने की प्रक्रिया बढ़ेगी।