लखनऊ के लामार्टिनियर गर्ल्स कॉलेज के पास अमर उजाला के एक विशेष अभियान के दौरान स्कूली वैनों में सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी नजर आईं। नियमों के अनुसार स्कूली वाहनों की खिड़कियों पर लोहे की रेलिंग और बैग रखने की उचित व्यवस्था अनिवार्य है, लेकिन कई वैनों में ये नदारद मिलीं। एक वैन चालक ने स्वीकार किया कि वह क्षमता से अधिक बच्चे बिठाता है। उसने बताया कि वह अक्सर 10 से अधिक बच्चों को बिठा लेता है, जबकि वैन की क्षमता कम से कम 6 या 8 बच्चों की होती है। पूछने पर चालक ने आर्थिक कारणों का हवाला देते हुए कहा कि कम पैसों में गुज़ारा करना मुश्किल है। वैन के अंदर पीछे सीट पर 8 बच्चों को और आगे की तरफ दो बच्चों को बिठाया गया है।