पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के बयान पर VHP नेता विनोद बंसल ने कहा, "हामिद अंसारी का जो देशद्रोही चरित्र है वो किसी से छिपा नहीं है। वे पहले भी PFI की वकालत किया करते थे लेकिन 17 बार के आक्रमणकारी को स्वदेशी बताना, ऐसा दुर्दांत आतंकी जिसने सोमनाथ मंदिर को लूटा, तोड़ा, ध्वस्त किया..नालंदा विश्वविद्यालय पर भी हमला करने वाला ये गजनवी ही था। ऐसे आक्रांताओं का महिमामंडन करना, उन्हें चिकनी-चुपड़ी बातों में लपेटकर जनता के सामने रखना। उनके इको सिस्टम के इतिहासकारों ने ही भारत के इतिहास को विकृत करने का प्रयास किया है। इस समय ऐसे बयान देना, लगता है कि कांग्रेस से उनका मोह फिर से जागृत हो रहा है... उन्हें स्पष्ट करना चाहिए कि उन्हें आक्रांता को आक्रांता कहने में शर्म क्यों आती है?
पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के एक हालिया बयान को लेकर सियासी और सामाजिक माहौल काफी गरमा गया है, जिसमें विश्व हिन्दू परिषद (VHP) ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। अंसारी ने एक इंटरव्यू में कहा था कि इतिहास में जिन शासकों को आक्रमणकारी कहा जाता है, जैसे महमूद गजनी और लोदी वंश के शासक, वे विदेशी नहीं बल्कि भारतीय लुटेरे थे और राजनीतिक रूप से उन्हें विदेशी कहना सुविधाजनक हो सकता है, लेकिन वास्तविकता कुछ और है। उनके इस बयान को लेकर देश में राजनीतिक बहस तेज़ हो गई और बीजेपी सहित कई संघ-समर्थित संगठनों ने इसका विरोध किया है।
VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह दृष्टिकोण इतिहास और राष्ट्रीय भावनाओं का अपमान करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि अंसारी जैसे प्रतिष्ठित पद पर रहे व्यक्ति द्वारा ऐसे बीते इतिहास के आकलन को पेश करना न केवल भविष्य की पीढ़ियों के लिए भ्रम पैदा करता है, बल्कि महमूद गजनी जैसे इतिहास में उग्र आक्रमणकारी के कृत्यों का महिमामंडन जैसा प्रतीत होता है। बंसल ने सवाल उठाया कि जिसने सोमनाथ और अन्य पवित्र स्थल को लूटा, नालंदा विश्वविद्यालय पर हमला किया और मौजूदा भारतीय संस्कृति-परंपरा को क्षति पहुँचाई, ऐसे व्यक्ति को “स्वदेशी” कहे जाने का क्या औचित्य है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अंसारी के इस रुख से राजनीतिक पक्षपात और इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का प्रयास लगता है।
VHP की प्रतिक्रिया में यह भी ज़ोर दिया गया कि अंसारी पहले भी विवादित बयानों के लिए सुर्खियों में रहे हैं और उनके इस बयान से हिंदू समुदाय की भावनाएँ आहत हुई हैं। ऐसे बयान ऐतिहासिक तथ्यों और देश की संस्कृति-परंपरा की समझ को कमजोर करने वाली चिंताओं को जन्म देते हैं, जिससे सामाजिक ध्रुवीकरण और राजनीतिक तनाव की संभावनाएँ बढ़ सकती हैं। VHP का कहना रहा है कि इतिहास को उचित संदर्भ में ही समझना चाहिए और ऐसे टिप्पणीकारों से अपेक्षा की जाती है कि वे वैज्ञानिक और ऐतिहासिक प्रमाणों के आधार पर ही विचार व्यक्त करें, न कि भावनात्मक रूप से विवादित भाषा का उपयोग करें।
यह विवाद राष्ट्रीय राजनीति के व्यापक माहौल में सामने आया है, जहाँ इतिहास की व्याख्या, राष्ट्रीय पहचान और सामजिक भावना जैसे मुद्दे चुनावों और पार्टी-राजनीति के बीच महत्वपूर्ण बहस-बिंदु बनते जा रहे हैं। कांग्रेस ने भी अंसारी के बयान पर अपना पक्ष रखते हुए कोशिश की है कि इसे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संदर्भ में समझा जाए, जबकि विपक्षी दलों ने इसे इतिहास का अपमान और राष्ट्रवाद के खिलाफ बयान बताया है, जिससे यह मुद्दा और गहराता दिख रहा है।