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US Attacks Venezuela: मादुरो और उनकी पत्नी को क्यों पकड़कर ले गया अमेरिका?

अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Updated Sat, 03 Jan 2026 09:17 PM IST

अमेरिका और वेनेजुएला के बीच क्या अब खुली जंग की शुरुआत हो चुकी है? क्या वाकई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर देश से बाहर भिजवा दिया है? कैरिबियाई सागर में धमाकों, नीची उड़ान भरते विमानों और राष्ट्रीय आपातकाल के बीच आखिर क्या हुआ था उस रात? और अगर यह सब सच है, तो लैटिन अमेरिका की राजनीति, तेल बाजार और वैश्विक शक्ति संतुलन पर इसका क्या असर पड़ेगा? इन तमाम सवालों के जवाब तलाशेंगे इस रिपोर्ट में।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा दावा किया है, जिसने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ने वेनेजुएला और उसके राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ “बड़े पैमाने पर कार्रवाई” को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। इस कार्रवाई में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ लिया गया है और उन्हें देश से बाहर ले जाया गया है। ट्रंप के मुताबिक, यह अभियान अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सहयोग से किया गया है और इस पूरे ऑपरेशन से जुड़ी विस्तृत जानकारी जल्द साझा की जाएगी।

डोनाल्ड ट्रंप ने यह जानकारी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर साझा की। उन्होंने यह भी बताया कि इस मामले को लेकर आज सुबह 11 बजे (स्थानीय समय) फ्लोरिडा के मार-ए-लागो में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की जाएगी, जहां इस कार्रवाई से जुड़े और तथ्य सामने रखे जाएंगे।

ट्रंप के इस दावे से पहले वेनेजुएला की राजधानी कराकास में शनिवार तड़के अचानक दहशत का माहौल बन गया था। समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय समयानुसार रात करीब दो बजे शहर के कई इलाकों में कम से कम सात जोरदार धमाके सुने गए। लोगों ने आसमान में नीची उड़ान भरते विमानों की आवाजें भी सुनीं।

धमाकों की आवाज सुनते ही कई इलाकों में लोग घबराकर अपने घरों से बाहर निकल आए। कुछ जगहों पर लोग सड़कों पर जमा होकर आसमान की ओर देखते नजर आए। इसी बीच यह भी खबर आई कि राष्ट्रपति मादुरो ने देश में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर दी है। हालांकि उस वक्त धमाकों की वजह और स्रोत को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी थी। अब ट्रंप के दावे के बाद उन घटनाओं को इसी कथित अमेरिकी कार्रवाई से जोड़कर देखा जा रहा है।

अमेरिका और वेनेजुएला के बीच विवाद कोई नया नहीं है। बीते कुछ वर्षों में यह टकराव बेहद आक्रामक रूप ले चुका है। सितंबर 2025 से ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला पर दबाव बढ़ाना शुरू किया। अमेरिका ने प्रतिबंधों के साथ-साथ वेनेजुएला की नावों को निशाना बनाना शुरू किया। अमेरिकी बलों ने कैरिबियाई सागर और पूर्वी प्रशांत क्षेत्र में वेनेजुएला की दो दर्जन से ज्यादा नावों पर हमले किए। इन हमलों में 100 से अधिक लोगों के मारे जाने की खबरें सामने आईं।

अमेरिका का दावा रहा कि इन नावों के जरिए मादक पदार्थों की तस्करी की जा रही थी, जबकि वेनेजुएला ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया और कहा कि अमेरिका के पास कोई ठोस सबूत नहीं हैं। इस मुद्दे को वेनेजुएला ने संयुक्त राष्ट्र तक में उठाया, लेकिन अमेरिका ने अब तक सार्वजनिक रूप से कोई प्रमाण पेश नहीं किया।

अक्तूबर में पेंटागन ने अमेरिकी नौसेना के सबसे आधुनिक और खतरनाक युद्धपोतों में से एक यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड को कैरिबियाई सागर में तैनात कर दिया। इसके साथ ही वेनेजुएला के आसपास करीब 5,000 अमेरिकी सैनिकों की तैनाती की गई, जबकि दक्षिण अमेरिका में कुल 15,000 अमेरिकी बल मौजूद बताए गए। इसे क्षेत्र में वर्षों की सबसे बड़ी अमेरिकी सैन्य तैनाती माना गया।

अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल पर लगे प्रतिबंधों के तहत उसके तेल टैंकरों की जब्ती भी तेज कर दी। ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में वेनेजुएला की नौसैन्य घेरेबंदी की भी पुष्टि की थी। खुद ट्रंप यह कह चुके हैं कि उन्होंने सीआईए को वेनेजुएला के खिलाफ खुफिया कार्रवाई की मंजूरी दी है और अमेरिकी हमले समुद्र से आगे बढ़कर वेनेजुएला के अंदर तक जा सकते हैं।

अब ट्रंप का यह ताजा दावा कि मादुरो को गिरफ्तार कर देश से बाहर ले जाया गया है अगर आधिकारिक तौर पर पुष्टि हो जाता है, तो यह लैटिन अमेरिका की राजनीति में भूचाल ला सकता है और अमेरिका–वेनेजुएला संबंधों को निर्णायक मोड़ पर पहुंचा सकता है। दुनिया की नजरें अब मार-ए-लागो में होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी हैं।

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