उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी का PDA फॉर्मूला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक, आपने अबतक यही सुना होगा। कहा जाता है की ये वही सामाजिक समीकरण है जिसने 2024 लोकसभा चुनाव में सपा को बड़ी बढ़त दिलाई थी। लेकिन अब सवाल उठ रहा है कि क्या अखिलेश यादव इस फॉर्मूले का दायरा बढ़ाने जा रहे हैं? या फिर यूं कहे तो क्या अखिलेश यादव के PDA का गणित बदल गया है? आखिर क्यों उठा ये सवाल। इस सवाल का जवाब देने के लिए आपको लिए चलता हूं अमर उजाला संवाद 2026 के मंच पर जहां अखिलेश यादव का भी आगमन हुआ।
दरअसल, अमर उजाला संवाद 2026 में पहुंचे उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने विपक्ष के चेहरे पर सवाल पूछे जाने पर किसी नेता का नाम तो नहीं लिया, बल्कि मुद्दों को ही विपक्ष का असली चेहरा बताया। इसके साथ ही उन्होंने बीजेपी पर तीखा हमला बोला। इससे पहले की आपको PDA का बयान सुनाऊ जरा सुनिए अखिलेश यादव ने विपक्ष के चेहरे पर कौन से नाम गिनवा दिए।
ये तो बात हो गई विपक्ष की। अखिलेश यही नहीं रुके, इसके बाद उन्होंने PDA का जिक्र किया। इसमे उन्होंने BJP पर जमकर निशाना साधा और BJP के 'P' और PDA के 'P' का मायने भी समझाया। अखिलेश यादव ने कहा कि “जहां बीजेपी खत्म होती है, वहां से PDA शुरू होता है।” उन्होंने बीजेपी और PDA में मौजूद 'P' का फर्क बताते हुए कहा कि बीजेपी ने ‘P’ को सबसे आखिर में रखा, जबकि समाजवादी पार्टी ने ‘P’ को सबसे आगे रखा है। इसके बाद उन्होंने PDA के 'P' का मतलब समझाया।
अखिलेश का PDA के 'P' का मतलब समझाया और BJP पर भी निशाना साधा। जैसे-जैसे उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 नजदीक आएगा वैसे-वैसे प्रदेश का राजनैतिक पारा भी बढ़ता नजर आएगा।