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UP Budget Session: यूपी विधानसभा में 9 फरवरी से गूंजेंगे जनता के मुद्दे, 20 तक प्रस्तावित है कार्यवाही

वीडियो डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम Updated Mon, 09 Feb 2026 02:30 AM IST


उत्तर प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 9 फरवरी 2026 (सोमवार) से शुरू होने जा रहा है और यह 20 फरवरी तक चलेगा, जिसमें सदन में जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा और निर्णय प्रस्तावित हैं। सत्र की शुरुआत राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के अभिभाषण से होगी, जिसमें वे सरकार की प्राथमिकताओं और भविष्य के एजेंडे को रेखांकित करेंगी। इसके बाद वित्त मंत्री सुरेश खन्ना 11 फरवरी को 2026-27 के लिए राज्य का बजट पेश करेंगे, जो इस बार ऐतिहासिक रूप से भारी-भरकम होने की संभावना जताई जा रही है और प्रदेश के आर्थिक विकास, सामाजिक कल्याण तथा जनहित के कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान देगा।

सत्र को सुचारू रूप से चलाने और सदस्यों को जनता के मुद्दों को प्रभावी तरीके से उठाने का मौका देने के लिए विधानसभा ने रोजाना 5 बजे से 8 बजे तक विशेष चर्चा का समय निर्धारित किया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सदन सिर्फ विधायी कार्यों तक सीमित न रहे, बल्कि आम लोगों की समस्याओं जैसे बेरोज़गारी, किसान संकट, महिलाओं-युवाओं की सुरक्षा, बुनियादी सेवाओं की उपलब्धता आदि पर खुलकर बहस हो सके। विपक्षी दलों से भी राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री ने स्वस्थ चर्चा का आह्वान किया है ताकि लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप मुद्दों को सामने लाया जा सके और समाधान ढूँढने में संयुक्त प्रयास हों।

इस बजट सत्र की राजनीतिक परिप्रेक्ष्य भी काफी महत्वपूर्ण है। सत्ताधारी पार्टी और विपक्ष दोनों ही जनता के मुद्दों को लेकर सदन में तीखी बहस करने की तैयारी में हैं, जिससे कार्यवाही कभी-कभी विवादित या तनावपूर्ण भी हो सकती है। विपक्ष विशेषकर मतदाता सूची (SIR), सुरक्षा, महंगाई, बेरोज़गारी और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को उठाने पर जोर दे रहा है, जबकि सरकार जनहित के योजनाओं तथा विकास परियोजनाओं पर अपने दृष्टिकोण को स्पष्ट करेगी। इसी प्रकार सदन में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुगम कार्यवाही के लिए सभी सदस्यों को जिम्मेदारी से पेश आने का संदेश दिया गया है।

सत्र के दौरान जनता के मुद्दों के अलावा वित्तीय निर्णयों, विनियोग विधेयक, नीति प्रस्तावों और सरकारी परियोजनाओं पर भी विस्तृत चर्चा होगी, जो सीधे प्रदेश की जनता के जीवन और विकास को प्रभावित करेंगे। इस प्रकार यह सत्र न केवल बजट पेश करने का मौका है, बल्कि उत्तर प्रदेश में आम जनता की अपेक्षाओं, शिकायतों और सुझावों को सरकारी मंच पर आवाज़ देने का एक महत्वपूर्ण समय भी है, जिससे लोकतंत्र के सिद्धांतों को और मजबूती मिलेगी।

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