एक महीने पहले जब पश्चिम एशिया में युद्ध की आहट तेज हुई और अमेरिका तथा इस्राइल ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की, तब पूरी दुनिया में एक ही डर फैल गया था क्या यह संघर्ष तीसरे विश्व युद्ध का रूप ले सकता है? विशेषज्ञों और रणनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि अगर ईरान जवाबी हमला करता है, तो अमेरिका के सहयोगी देश, खासकर नाटो और यूरोपीय संघ के सदस्य, उसके साथ खड़े होंगे। लेकिन जैसे-जैसे समय बीता, यह साफ होता गया कि यह युद्ध केवल हथियारों का नहीं, बल्कि कूटनीति, गठबंधनों और हितों का भी है। ईरान ने पलटवार जरूर किया, लेकिन जिस तरह की एकजुटता की उम्मीद अमेरिका को अपने सहयोगियों से थी, वह देखने को नहीं मिली।
कई यूरोपीय देशों ने साफ शब्दों में कह दिया कि यह संघर्ष अमेरिका ने खुद शुरू किया है, इसलिए वे इसमें सीधे तौर पर शामिल नहीं होंगे। यही वह मोड़ था, जहां से वैश्विक राजनीति में एक नई बहस ने जन्म लिया क्या नाटो अब भी उतना ही मजबूत और प्रभावी है, जितना कभी हुआ करता था? अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस स्थिति से खासे नाराज नजर आए। उन्होंने न सिर्फ अपने सहयोगियों की आलोचना की, बल्कि सार्वजनिक मंचों पर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रूथ सोशल’ पर उन्होंने नाटो को “कागज का शेर” तक कह दिया। यह बयान सिर्फ गुस्से का इजहार नहीं था, बल्कि उस गहरी निराशा को दर्शाता था, जो अमेरिका को अपने पारंपरिक सहयोगियों के रवैये से हो रही थी।
यहीं से एक और बड़ा सवाल सामने आया क्या अमेरिका वास्तव में नाटो जैसे ऐतिहासिक सैन्य गठबंधन से बाहर निकल सकता है? और अगर ऐसा होता है, तो इसका असर दुनिया पर क्या पड़ेगा? नाटो, यानी नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन, केवल एक सैन्य गठबंधन नहीं है, बल्कि यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी उस वैश्विक व्यवस्था का आधार स्तंभ है, जिसने दशकों तक यूरोप में शांति और संतुलन बनाए रखा। 1949 में वॉशिंगटन डीसी में 12 देशों ने मिलकर इसकी स्थापना की थी। उस समय इसका मुख्य उद्देश्य था सोवियत संघ के बढ़ते प्रभाव को रोकना और पश्चिमी देशों की सामूहिक सुरक्षा सुनिश्चित करना। नाटो का सबसे अहम सिद्धांत है आर्टिकल 5। इसका मतलब है कि अगर किसी एक सदस्य देश पर हमला होता है, तो उसे पूरे गठबंधन पर हमला माना जाएगा। यानी सभी सदस्य देश मिलकर उसका जवाब देंगे। यही वह सिद्धांत है, जिसने नाटो को दुनिया के सबसे शक्तिशाली सैन्य गठबंधनों में से एक बनाया।