तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक मदन मित्रा ने पार्टी छोड़कर किसी अन्य दल में शामिल होने या अलग राजनीतिक रास्ता अपनाने की चर्चा कर रहे नेताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह उनसे बातचीत करेंगे। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं ने चुनाव लड़ा था, उन्होंने जनता से यह कहकर समर्थन मांगा था कि वे टीएमसी को मजबूत करेंगे और ममता बनर्जी के नेतृत्व को आगे बढ़ाएंगे। उनके अनुसार, चुनाव के समय इन नेताओं ने टीएमसी और ममता बनर्जी के प्रति अपनी निष्ठा जताई थी, लेकिन अब यदि वे किसी दूसरी पार्टी में विलय या अलग राजनीतिक कदम उठाने की बात कर रहे हैं, तो यह उनके पहले किए गए वादों से पीछे हटना है।
मदन मित्रा ने इसे राजनीतिक ईमानदारी के दृष्टिकोण से उचित नहीं बताया और कहा कि जनता के सामने जो बात रखी गई थी, उससे अलग रास्ता अपनाना “बेइमानी” माना जा सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि संबंधित नेता ऐसा करना चाहते हैं तो यह उनका निर्णय है, लेकिन किसी नए राजनीतिक दल के गठन या अलग समूह को मान्यता दिलाने के लिए आवश्यक संख्या और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं। उनके मुताबिक, फिलहाल संबंधित नेताओं की संख्या इतनी नहीं है कि वे आसानी से अलग पार्टी बनाकर राजनीतिक मान्यता प्राप्त कर सकें।
उन्होंने आगे कहा कि इस पूरे मामले में अभी कई संवैधानिक और राजनीतिक प्रक्रियाएं बाकी हैं, इसलिए जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। मदन मित्रा ने संकेत दिया कि वह पहले संबंधित नेताओं से चर्चा करेंगे और स्थिति को समझने का प्रयास करेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि इन नेताओं की वास्तविक रणनीति क्या है और वे किस दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं। कुल मिलाकर, मदन मित्रा ने इस घटनाक्रम पर नाराजगी जताते हुए इसे टीएमसी के प्रति किए गए राजनीतिक वादों से विचलन बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि अंतिम स्थिति विभिन्न प्रक्रियाओं और आगे होने वाली बातचीत के बाद ही स्पष्ट होगी।