स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने हाल ही में गो-रक्षा कानून को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश में करीब 78 वर्षों से गो-रक्षा के लिए सख्त और एक समान कानून बनाने की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक इस विषय को लगातार टालते रहने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत में गाय को प्राचीन समय से ही धार्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। हिंदू धर्म में गाय को “गौ माता” का दर्जा दिया गया है और उसे संरक्षण देने की परंपरा सदियों पुरानी है। आजादी के बाद भी अनेक संत-महात्माओं, धार्मिक संगठनों और सामाजिक समूहों ने केंद्र सरकार से पूरे देश में कड़ा और समान गो-रक्षा कानून लागू करने की मांग की, लेकिन यह मुद्दा अभी तक राष्ट्रीय स्तर पर पूरी तरह लागू नहीं हो पाया है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि संविधान के राज्य नीति के निदेशक तत्वों में भी सरकारों को पशुधन की रक्षा करने और विशेष रूप से गाय और उसके वंश के संरक्षण के लिए प्रयास करने की बात कही गई है। इसके बावजूद आज देश में अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नियम हैं—कुछ राज्यों में गो-हत्या पर पूरी तरह प्रतिबंध है, जबकि कुछ जगहों पर आंशिक प्रतिबंध या अलग व्यवस्था लागू है। उनका कहना है कि इस असमानता के कारण गो-रक्षा से जुड़ी नीतियां प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो पा रही हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब देश में गाय को करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक माना जाता है, तब राष्ट्रीय स्तर पर एक स्पष्ट और सख्त कानून बनना चाहिए, जिससे पूरे देश में एक समान व्यवस्था लागू हो सके।
उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कई दशकों में संत समाज ने कई बार आंदोलन और पदयात्राएं की हैं, ज्ञापन दिए हैं और सरकारों से इस विषय पर निर्णय लेने का आग्रह किया है। लेकिन हर बार आश्वासन तो मिलता है, पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के अनुसार अब समय आ गया है कि सरकार इस मुद्दे को लंबित रखने के बजाय स्पष्ट नीति बनाए और संसद में कानून लाकर इसे लागू करे। उनका कहना है कि गो-रक्षा केवल धार्मिक आस्था का विषय ही नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि और पर्यावरण से भी जुड़ा हुआ मुद्दा है। इसलिए सरकार को संत समाज और जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए जल्द से जल्द इस विषय पर ठोस निर्णय लेना चाहिए, ताकि वर्षों से चली आ रही मांग को पूरा किया जा सके और देश में गो-संरक्षण की व्यवस्था को मजबूत बनाया जा सके।