वरिष्ठ अधिवक्ता और ऑल इंडिया बार एसोसिएशन के अध्यक्ष, आदिश सी. अग्रवाल कहते हैं, ".आज हमने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को हमारे साथी वकील द्वारा हमारे मुख्य न्यायाधीश के साथ किए गए दुर्व्यवहार के संबंध में एक पत्र भेजा है। उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए, जाँच शुरू की जानी चाहिए और चार्जशीट तैयार की जानी चाहिए ताकि उनके खिलाफ मामला आगे बढ़ सके। मुख्य न्यायाधीश गवई बहुत दयालु हैं, इसीलिए उन्होंने इस घटना में कोई कार्रवाई न करने की सलाह दी, और यहाँ तक कि सॉलिसिटर जनरल ने भी कहा कि वे रिपोर्ट दर्ज नहीं करना चाहते। हालाँकि, यह अपराध राज्य और सरकार के खिलाफ है.इसलिए, मैंने पुलिस को लिखा है कि बीएनएस की 6 धाराएँ हैं जिनके तहत उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। मुख्य न्यायाधीश भी अदालत की अवमानना की कार्यवाही शुरू कर सकते हैं, लेकिन अपनी उदारता दिखाते हुए और अदालत का समय बर्बाद करने से बचने के लिए, उन्होंने उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू नहीं की है।
उन्होंने कहा कि इस तरह का व्यवहार पूरी तरह से अस्वीकार्य है और किसी भी व्यक्ति को, चाहे उसकी कोई भी शिकायत हो, अदालत की कार्यवाही में इस तरह से बाधा डालने का कोई अधिकार नहीं है अग्रवाल ने कहा कि दोषी व्यक्ति को कानून के अनुसार परिणाम भुगतने चाहिए। यह समाज में बढ़ती असहिष्णुता को दर्शाता है और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है। इस मामले में, उनका बयान एक निंदनीय कृत्य पर प्रतिक्रिया थी और इसमें कानूनी कार्रवाई का आह्वान किया गया था, लेकिन यह AIBA की ओर से FIR दर्ज करने की औपचारिक मांग नहीं थी।
ऑल इंडिया बार एसोसिएशन के अध्यक्ष आदिश सी. अग्रवाल ने न्यायाधीशों द्वारा वकीलों के साथ दुर्व्यवहार के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है और CJI से इस पर कार्रवाई करने का आग्रह किया है। उन्होंने CJI के साथ हुए दुर्व्यवहार की किसी घटना पर FIR दर्ज करने की कोई औपचारिक मांग नहीं की है, लेकिन उन्होंने CJI की अदालत में व्यवधान डालने के कृत्य की निंदा करते हुए दोषी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का समर्थन किया है।