सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर सफदरजंग अस्पताल की मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. चारू बांबा ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि उन्हें आज सुबह लगभग 7:30 बजे अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद सोनम वांगचुक अब भी अपने उपवास पर कायम हैं और किसी भी प्रकार का पोषण या चिकित्सकीय तरल पदार्थ लेने के लिए तैयार नहीं हैं। डॉ. बांबा के अनुसार, फिलहाल उनके सभी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संकेतक (वाइटल पैरामीटर) जैसे रक्तचाप (ब्लड प्रेशर), नाड़ी की गति (पल्स रेट) और ऑक्सीजन सैचुरेशन सामान्य और स्थिर बने हुए हैं। इसके अलावा वे पूरी तरह से होश में हैं, मानसिक रूप से सतर्क हैं और उन्हें अपने आसपास की सभी परिस्थितियों की पूरी जानकारी है। हालांकि डॉक्टरों ने यह भी स्पष्ट किया कि उनमें डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी के स्पष्ट लक्षण दिखाई दे रहे हैं, जो लंबे समय तक उपवास जारी रहने की स्थिति में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं। अस्पताल की मेडिकल टीम का मानना है कि उनकी वर्तमान स्थिति को देखते हुए उन्हें तत्काल उपचार और शरीर में तरल पदार्थ की पूर्ति की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से डॉक्टर लगातार उन्हें ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ओआरएस), इलेक्ट्रोलाइट युक्त तरल पदार्थ और आवश्यकता पड़ने पर नसों के माध्यम से दी जाने वाली आईवी फ्लूइड थेरेपी लेने के लिए समझाने का प्रयास कर रहे हैं।
लेकिन बार-बार काउंसलिंग किए जाने के बावजूद सोनम वांगचुक इन सभी चिकित्सकीय उपायों को स्वीकार करने से इनकार कर रहे हैं। डॉ. चारू बांबा ने बताया कि मामले की गंभीरता और उच्च न्यायालय के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. अक्षय कुमार को भी मेडिकल टीम में शामिल किया गया है। उन्होंने अस्पताल पहुंचकर सोनम वांगचुक की विस्तृत चिकित्सकीय जांच की, उनकी मेडिकल हिस्ट्री का अध्ययन किया और उनकी मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति का आकलन किया। डॉ. अक्षय कुमार की विशेषज्ञ राय भी सफदरजंग अस्पताल की मेडिकल टीम के निष्कर्षों से पूरी तरह मेल खाती है। डॉक्टरों का कहना है कि फिलहाल मरीज की हालत स्थिर है, लेकिन लगातार उपवास और शरीर में पानी की कमी आगे चलकर गंभीर जटिलताएं पैदा कर सकती है। इसलिए अस्पताल प्रशासन उनकी स्थिति पर चौबीसों घंटे लगातार निगरानी रखे हुए है। मेडिकल टीम समय-समय पर उनके स्वास्थ्य संकेतकों की जांच कर रही है और उन्हें यह समझाने का प्रयास भी जारी है कि वे कम से कम ओआरएस, इलेक्ट्रोलाइट घोल या फ्लूइड थेरेपी स्वीकार करें, ताकि डिहाइड्रेशन को नियंत्रित किया जा सके और संभावित स्वास्थ्य जोखिमों को कम किया जा सके। हालांकि अब तक सोनम वांगचुक अपने निर्णय पर अडिग हैं और किसी भी प्रकार का चिकित्सकीय तरल या उपचार लेने के लिए सहमत नहीं हुए हैं।