पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने गुरुवार देर रात अपना 26 दिनों से जारी अनशन समाप्त कर दिया। गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात के बाद उन्होंने यह फैसला लिया। दोनों केंद्रीय मंत्रियों ने अस्पताल में वांगचुक का हालचाल जाना और जेपी नड्डा ने अपने हाथों से उन्हें जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया। इस दौरान उनकी पत्नी गीतांजलि एंग्मो, डॉक्टरों की टीम और अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक भी मौजूद रहे।
सोनम वांगचुक ने कथित परीक्षा पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों की मांगों के समर्थन में 28 जून 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल शुरू की थी। आंदोलन के दौरान उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई और उनका वजन भी काफी कम हो गया। स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को देखते हुए अदालत के निर्देश और डॉक्टरों की सलाह पर 19 जुलाई को उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। बाद में दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर उन्हें बेहतर इलाज के लिए गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित किया गया। अस्पताल में भर्ती रहने के बावजूद उन्होंने अपना अनशन जारी रखा।
अनशन समाप्त करने के बाद सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने बताया कि विभिन्न राजनीतिक दलों के 65 सांसदों ने उनसे मुलाकात की या पत्र लिखकर अनशन समाप्त करने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि सरकार के साथ कई दौर की लंबी बातचीत हुई, कई शर्तों पर सहमति बनी और देश में संभावित हिंसा की आशंका को देखते हुए उन्होंने अपना अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया।
वांगचुक ने कहा कि इस समझौते की सभी शर्तों की विस्तृत जानकारी वह जल्द ही एक अलग वीडियो संदेश के माध्यम से साझा करेंगे। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे पूरी तरह सतर्क रहें और किसी भी परिस्थिति में हिंसा का रास्ता न अपनाएं। उनके मुताबिक, छात्रों की लड़ाई शांतिपूर्ण तरीके से ही आगे बढ़नी चाहिए।
इस घटनाक्रम पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वह सोनम वांगचुक के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि वांगचुक डॉक्टरों की सलाह का पालन करें, अपनी नियमित दिनचर्या अपनाएं और जल्द से जल्द अपना पुराना स्वास्थ्य और वजन वापस हासिल करें। उन्होंने उनके अच्छे स्वास्थ्य के लिए ईश्वर से प्रार्थना भी की।
वहीं, छात्र आंदोलन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि सोनम वांगचुक के 26 दिन बाद अनशन समाप्त करने से सभी को राहत मिली है। उन्होंने वांगचुक के साहस और त्याग की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवन को दांव पर लगाकर पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोर दिया। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि जंतर-मंतर पर सीजेपी का शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहेगा और यह तब तक समाप्त नहीं होगा, जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर कार्रवाई नहीं होती।
सोनम वांगचुक का अनशन समाप्त होने से छात्र आंदोलन के एक महत्वपूर्ण अध्याय का समापन जरूर हुआ है, लेकिन परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुधार को लेकर उठे सवाल अब भी कायम हैं। अब सभी की नजर सरकार और आंदोलनकारी संगठनों के अगले कदम पर रहेगी।