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Ram mandir Donation Case: चंदा चोरी मामले की SIT जांच पर CM योगी पर भड़के स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Updated Fri, 17 Jul 2026 12:57 AM IST

गौ-रक्षा जनजागरण यात्रा के तहत प्रदेशभर का दौरा कर रहे ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती गोंडा पहुंचे, जहां उन्होंने धर्मसभा को संबोधित करने के साथ-साथ विभिन्न समसामयिक मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया भी व्यक्त की। इस दौरान उन्होंने गौ-संरक्षण के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि गाय भारतीय संस्कृति, आस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आधारशिला है, इसलिए उसकी सुरक्षा केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय जिम्मेदारी भी है। अपने संबोधन में उन्होंने अयोध्या राम मंदिर निर्माण के दौरान सामने आए कथित चंदा चोरी मामले का भी उल्लेख किया और उत्तर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए। शंकराचार्य ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले इस मामले में विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की बात कही थी और सार्वजनिक रूप से यह आश्वासन दिया था कि जांच के बाद "दूध का दूध और पानी का पानी" हो जाएगा तथा सच्चाई सबके सामने आ जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद जब मुख्यमंत्री दोबारा अयोध्या पहुंचे तो इस मुद्दे पर अपेक्षित स्पष्टता सामने नहीं आई। 

शंकराचार्य का कहना था कि सरकार को जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक करने चाहिए थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बाद में 27 वर्ष पुरानी एक घटना को नए सिरे से चर्चा में लाकर लोगों का ध्यान मूल सवाल से हटाने का प्रयास किया गया। उनके अनुसार जनता और मीडिया को यह पूछना चाहिए कि जिस जांच का वादा किया गया था, उसका परिणाम क्या निकला और कथित अनियमितताओं के संबंध में क्या कार्रवाई हुई। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने स्वयं निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया था तो उसकी रिपोर्ट और निष्कर्ष भी सार्वजनिक होने चाहिए, ताकि किसी प्रकार का भ्रम या विवाद न रहे। शंकराचार्य ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में जवाबदेही आवश्यक है और जनता को अपने सवाल पूछने का अधिकार है। उन्होंने मीडिया से भी आग्रह किया कि वह मूल मुद्दों पर ध्यान केंद्रित रखे और केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित न रहे। उल्लेखनीय है कि शंकराचार्य द्वारा लगाए गए ये आरोप और टिप्पणियां उनके व्यक्तिगत विचार हैं। सरकार की ओर से समय-समय पर यह कहा जाता रहा है कि कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाती है। इस विषय पर विभिन्न पक्षों के अलग-अलग दावे हैं और मामले से जुड़े तथ्यों का अंतिम निर्धारण आधिकारिक जांच तथा संबंधित एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर ही माना जाएगा।

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