रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन की संयुक्त अध्यक्षता करेंगे। इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात को रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि भारत और रूस दोनों ही आने वाले वर्षों में रक्षा सहयोग को नए स्तर पर ले जाने की तैयारी में हैं। इसमें खासकर एयर डिफेंस सिस्टम, संयुक्त सैन्य परियोजनाएं, लड़ाकू विमानन और हाई-टेक हथियारों के क्षेत्र में बड़े फैसले शामिल हो सकते हैं।
पुतिन की यात्रा से ठीक पहले रूस ने संकेत दिए कि भारत के साथ लड़ाकू विमानन के क्षेत्र में व्यापक सहयोग की गुंजाइश है। रूस की सैन्य-तकनीकी सहयोग से जुड़ी संघीय सेवा के निदेशक दिमित्री शुगायेव ने बताया कि दोनों देश सुखोई-30 लड़ाकू विमानों के लाइसेंस प्राप्त उत्पादन को बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। भारत पहले ही बड़ी संख्या में इन विमानों का उपयोग करता है, इसलिए इसका उन्नत संस्करण देश में ही तैयार करना रणनीतिक रूप से फायदेमंद होगा।
इसके साथ ही रूस ने एक और बड़ा प्रस्ताव रखा है भारत के साथ पाँचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान (5th Generation Fighter Jet) के संयुक्त विकास का। इस सहयोग में सुखोई-57 स्टील्थ फाइटर जेट के लाइसेंस प्राप्त उत्पादन की पेशकश भी शामिल है। सुखोई-57 दुनिया के उन्नत स्टील्थ लड़ाकू विमानों में गिना जाता है और भारत के लिए यह तकनीक भविष्य की वायु-शक्ति को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है। भारत और रूस के बीच आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम, अत्याधुनिक ड्रोन (UAVs) और एडवांस्ड एयर-टू-एयर मिसाइलों के संयुक्त उत्पादन पर भी बात आगे बढ़ सकती है। वर्तमान भू-राजनीतिक माहौल में भारत अपनी वायु क्षमता को तेज गति से अपग्रेड करना चाहता है ऐसे में रूस की तकनीक और भारत की उत्पादन क्षमता दोनों देशों को पारस्परिक लाभ दे सकती है।