पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने फरीदकोट से जुड़े फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा विवाद में महत्वपूर्ण हस्तक्षेप करते हुए अगली सुनवाई तक भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। मामला जुलाई 2026 में आयोजित फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा से जुड़ा है, जिसका आयोजन बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज, फरीदकोट द्वारा किया गया था। परीक्षा के बाद कथित अनियमितताओं और परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर सवाल उठे तथा दोबारा परीक्षा कराने की मांग को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई। याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने फिलहाल भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर रोक लगा दी।
इसका मतलब यह है कि अगली सुनवाई तक फार्मेसी ऑफिसर भर्ती से संबंधित नियुक्ति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी। इस मामले ने पंजाब में सरकारी भर्तियों की पारदर्शिता और परीक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज कर दी है। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने हाई कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए पंजाब सरकार पर निशाना साधा और दावा किया कि परीक्षा में पेपर लीक की शिकायतों के बावजूद सरकार ने परीक्षा को रद्द नहीं किया। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने इसे केवल अनियमितता बताया था और कथित तौर पर गड़बड़ी में शामिल लोगों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई थी।
संबित पात्रा के अनुसार, याचिकाकर्ता ने परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए दोबारा परीक्षा कराने की मांग की, जिसके बाद हाई कोर्ट ने सरकार से परीक्षा को रोकने और दोबारा आयोजित करने की आवश्यकता पर सवाल किए। दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने हाई कोर्ट के आदेश की अलग व्याख्या करते हुए कहा कि अदालत के आदेश को सीधे तौर पर ‘पेपर लीक’ कहना उचित नहीं है। उन्होंने दावा किया कि अदालत ने अपने आदेश में ‘पेपर लीक’ शब्द का इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि ‘चीटिंग रैकेट’ का उल्लेख किया है। उन्होंने यह भी कहा कि पेपर लीक और परीक्षा में नकल या चीटिंग अलग-अलग परिस्थितियां हैं और इनके बीच अंतर समझना जरूरी है। फिलहाल अदालत के अंतरिम आदेश के बाद फार्मेसी ऑफिसर भर्ती प्रक्रिया की आगे की कार्रवाई रुक गई है।
अगली सुनवाई में इस मामले की दिशा और स्पष्ट हो सकती है। अभ्यर्थियों के लिए यह मामला बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि दोबारा परीक्षा होती है या मौजूदा परीक्षा के आधार पर भर्ती आगे बढ़ती है, इसका असर हजारों उम्मीदवारों के भविष्य पर पड़ सकता है। साथ ही, यह मामला सरकारी भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, निष्पक्षता और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े बड़े सवाल भी सामने ला रहा है।