पूर्व डीजीपी के बेटे अकील अख्तर की मौत के मामले में गठित एसआईटी प्रमुख एसीपी विक्रम नेहरा ने कहा, "टीम फिलहाल पटियाला के एक नशामुक्ति केंद्र से मृतक के मेडिकल रिकॉर्ड और इलाज का विवरण इकट्ठा कर रही है। वे मृतक के आसपास रहने वाले स्थानीय लोगों के बयान भी दर्ज कर रहे हैं और संबंधित साक्ष्य जुटा रहे हैं। शिकायतकर्ता ने कुछ सबूत दिए हैं जिन्हें रिकॉर्ड कर लिया गया है. टीम मृतक के सोशल मीडिया अकाउंट्स की भी जाँच कर रही है। हालाँकि वीडियो बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया उपकरण अभी तक नहीं मिला है, लेकिन यह सुनिश्चित करने के लिए कि सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो के साथ छेड़छाड़ नहीं की गई है, उसे फोरेंसिक जाँच के लिए हासिल करने के प्रयास किए जा रहे हैं। अख्तर परिवार को जल्द ही जाँच में शामिल किया जाएगा और उन्हें नोटिस जारी किए जा रहे हैं.अभी तक शिकायतकर्ताओं के साथ कोई राजनीतिक संबंध नहीं पाए गए हैं। शिकायतकर्ता शम्सुद्दीन की पृष्ठभूमि अभी तक ज्ञात नहीं है, लेकिन उनकी शिकायत के आधार पर उन्हें एक प्रमुख शिकायतकर्ता माना जा रहा है।
अपने बेटे की मौत के सिलसिले में अपने, अपनी पत्नी, बेटी और बहू के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर पूर्व डीजीपी मोहम्मद मुस्तफा कहते हैं, "एक पिता के लिए अपने इकलौते बेटे को खोने से बड़ा कोई दर्द नहीं होता.इस त्रासदी ने मेरे अंदर के सिपाही को जगा दिया है ताकि मैं तुच्छ मानसिकता वालों के खिलाफ खड़ा हो सकूँ.बच्चा चाहे कितनी भी गलतियाँ करे, एक पिता हमेशा उन्हें दुनिया से बचाता है। फिर भी, कुछ लोगों ने इस स्थिति का तुच्छ राजनीति के लिए फायदा उठाने की कोशिश की है.मुझे कोई डर नहीं है, क्योंकि हमने कुछ भी गलत नहीं किया है.क्या आपने कभी किसी पिता को अपने ही बेटे की हत्या करते सुना है? पंजाब में युवाओं में नशाखोरी बहुत आम है, और मैं रोज़ाना युवाओं द्वारा अपने ही परिवार की हत्या की खबरें पढ़ता हूँ। लेकिन क्या आपने कभी किसी पिता, माँ, बेटी या बहू को ऐसे अपराध में शामिल होते सुना है? मेरा बेटा 18 साल तक नशे की लत से जूझता रहा.मैं खुद को उन बदकिस्मत पिताओं में गिनता हूँ जो इस असहनीय स्थिति का सामना कर रहे हैं।