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NDA के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार राधाकृष्णन के खिलाफ विपक्ष उतारेगा कैंडिडेट

Tue, 19 Aug 2025 11:02 AM IST
आदर्श वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम

संसद के गलियारों में सोमवार देर रात गहमागहमी का नजारा था। इंडी गठबंधन के नेताओं की बंद कमरे की बैठक खत्म होते ही यह तय हो गया कि विपक्ष उपराष्ट्रपति चुनाव में अपने उम्मीदवार को उतारेगा। भले ही संख्या बल विपक्ष के पक्ष में न हो, लेकिन इस दांव का मकसद साफ है—राजग को बिना चुनौती मैदान न देने का संदेश।

सूत्रों के अनुसार, महात्मा गांधी के पोते और इतिहासकार राजमोहन गांधी का नाम विपक्षी खेमे में सबसे प्रमुख रूप से उभरकर आया है। गांधी परिवार से जुड़ाव और एक संतुलित, विद्वान छवि उन्हें विपक्ष का साझा चेहरा बना सकती है। कांग्रेस समेत कई दलों को लगता है कि गांधी का नाम सामने रखने से विपक्षी एकता का संदेश और भी मजबूत जाएगा।

उधर राजग की तरफ से भाजपा ने पहले ही अपने पत्ते खोल दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में राजग ने महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन को उम्मीदवार बनाया है। यह नाम सिर्फ महाराष्ट्र ही नहीं बल्कि तमिल राजनीति को साधने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है, क्योंकि राधाकृष्णन मूल रूप से तमिलनाडु से ताल्लुक रखते हैं और लंबे समय तक वहां संगठनात्मक काम कर चुके हैं।

तमिलनाडु से एम. अन्नादुरई का नाम विपक्षी खेमे में गूंज रहा है। उन्हें ‘भारत का चांद पुरुष’ कहा जाता है। वे इसरो में लंबे समय तक काम कर चुके हैं और चंद्रयान मिशन से जुड़े रहे हैं। वर्तमान में वे तमिलनाडु राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के उपाध्यक्ष और राष्ट्रीय डिजाइन एवं अनुसंधान मंच के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष हैं। द्रमुक ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा है और कांग्रेस समेत अन्य सहयोगी दल भी इसे गंभीरता से देख रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अन्नादुरई जैसा वैज्ञानिक चेहरा विपक्ष को “राजनीति से ऊपर उठकर देशहित” की छवि पेश करने में मदद कर सकता है।

इसके अलावा द्रमुक के वरिष्ठ सांसद तिरुचि शिवा का नाम भी चर्चा में है। चार बार से राज्यसभा सांसद रह चुके शिवा को सभी दलों में सौम्य और स्वीकार्य नेता माना जाता है। खास बात यह है कि उनके राजग के कई नेताओं से भी अच्छे संबंध हैं। विपक्ष मानता है कि शिवा का नाम सामने रखने से भाजपा पर “सर्वसम्मति” का दबाव बनाया जा सकता है।

गौरतलब है कि उपराष्ट्रपति चुनाव में निर्णायक ताकत लोकसभा और राज्यसभा के कुल सांसदों की संयुक्त संख्या होती है। यहां राजग के पास स्पष्ट बढ़त है। ऐसे में विपक्षी खेमे को भी पता है कि यह चुनाव जीतना आसान नहीं है। लेकिन कांग्रेस और उसके सहयोगियों का मानना है कि “चुनाव जीतना लक्ष्य नहीं, बल्कि विपक्षी एकजुटता और वैचारिक संदेश देना अहम है।”

विपक्षी गठबंधन की अगली बड़ी बैठक मंगलवार सुबह होने वाली है। यहीं पर औपचारिक रूप से नाम तय किए जाएंगे। हालांकि सूत्रों का कहना है कि 20 अगस्त को आधिकारिक घोषणा हो सकती है। अभी यह साफ नहीं है कि गांधी, शिवा या अन्नादुरई में किसे चुना जाएगा, लेकिन तीनों ही नाम विपक्ष की विविधता और सोच का प्रतिनिधित्व करते हैं।

राजनीति के जानकार मानते हैं कि उपराष्ट्रपति चुनाव इस बार महज पद भरने की औपचारिकता नहीं होगा। यह दरअसल विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच “नैरेटिव की जंग” है।
    •    राजग राधाकृष्णन के जरिए यह संदेश देना चाहता है कि भाजपा दक्षिण भारत को लेकर गंभीर है।
    •    वहीं विपक्ष गांधी, शिवा या अन्नादुरई में से किसी एक नाम के जरिये यह जताना चाहता है कि वह सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक और वैचारिक विविधता का प्रतिनिधित्व करता है।

आंकड़ों की बाजी भले ही राजग के पक्ष में हो, लेकिन विपक्षी खेमे का यह फैसला दिखाता है कि 2025 की राजनीतिक पिच पर वह बिना लड़ाई हार मानने को तैयार नहीं है। उपराष्ट्रपति चुनाव का नतीजा तो शायद पहले से तय दिख रहा है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने एक बात साफ कर दी है—आने वाले वक्त में संसद से सड़क तक सत्ता और विपक्ष की टक्कर और तेज होगी।

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